विस्फोटक हुए पाक के हालात, राजधानी इस्लामाबाद सहित सभी बड़े शहरों के बाजार बंद-कारोबार ठप

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (13 जुलाई):  पाकिस्तान की पूरी सरकार इमरान खान की अमेरिकी यात्रा की तैयारियों में बिजी है और पाकिस्तान के लोग भीषण महंगाई और टैक्स के भारीभरकम बोझ का विरोध कर रही है। पाकिस्तान के लोग बेगारिया और देश दिवालिया हो चुका है। इन सब हालातों के हालापाकिस्तान के तमाम छोटे-बड़े शहरों के कारोबारियों ने पाकिस्तान बंद आंदोलन शुरु कर दिया है। बंद से बढ़ती दिक्कतों के बीच शनिवार को पूरे पाकिस्तान में लोग सड़कों पर उतर आए। लोगों को कबू करने में पाकिस्तानी सैन्यबलों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

विपक्षी दलों का आरोप है कि यह कर इस्लामाबाद के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के हाल के छह अरब डॉलर के राहत पैकेज के एक हिस्से के तौर पर लगाया गया है।  इस देशव्यापी हड़ताल में शॉपिंग मॉल से लेकर थोक बाजार, छोटी दुकानें और अन्य कारोबारियों ने हिस्सा लिया। लोगों और विपक्ष का कहना है कि सरकार की खराब वित्तीय नीतियों के कारण कीमतों में वृद्धि हुई है। कारोबारियों का कहना है कि आईएमएफ के इशारे पर तैयार बजट ने गरीबों की जिंदगी और मुश्किल बना दी है।

पाकिस्तान में बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है। कराची, इस्लामाबाद, खैबर पख्तूनवां, क्वेटा में बंद का सबसे ज्यादा असर है। खबरों की मानें तो प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस हड़ताल और बंद को टालने के लिए हरसंभव प्रयास किए थे और व्यापारियों से बातचीत की जो बेनतीजा रही। कारोबारियों का कहना है कि सरकार जबरन नए कर थोप रही है जो उन्हें मंजूर नहीं है। देश में उद्योग धंधों का हालत बेहद खस्ता है।

पाकिस्तान की खस्ता हालत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 159 पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गई हैं। देश में मंहगाई का आलम ये है कि एक लीटर दूध की कीमत 150 तक पहुंच गई थी। खाने पीने की चीजों के दामों में बेहतहाशा बढ़ोत्तरी हुई है। टमाटर 100 रुपये किलो तथा एक दर्जन अंडो की कीमत 125 रुपये है। इन सबसे से बेपरवाह पाकिस्तान आंतक का भरण पोषण करने के लिए अपना सबसे ज्यादा पैसा रक्षा पर खर्च कर रहा है।

इमरान खान की कई मिन्नतों के बाद पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के बीच कर्ज को लेकर जो समझौता हुआ है उसके तहत आईएमएफ पाकिस्तान को 6 अरब डॉलर की मदद देगा। सत्ता संभालने के बाद इस कर्ज के लिए इमरान खान को 9 महीने तक लगातार कोशिशें करनी पड़ी। इस कर्ज के लिए 39 महीनों का समय दिया गया है। इस कर्ज को अलग-अलग किस्तों में चार छमाही समीक्षाओं के बाद दिया जाएगा। कर्ज देने के बाद आईएमएफ ने कहा था कि इस समय पाकिस्तान की हालात अच्छी नहीं है वह देश में कर सुधारों का समर्थन करती है।

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