कब खुलेंगी सरकार की आंखे- '100 रुपये रोज की दिहाड़ी मजदूर है ये नेशनल प्लेयर'

नई दिल्ली (9 जनवरी): नेशनल कबड्डी और स्टेट एथलेटिक्स में गोल्ड सहित कई पदक जीत चुकी राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले के गोठड़ा गांव की खिलाड़ी देवा मीणा आज मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने को मजबूर है। देवा की स्थिति देख आदिवासियों-खिलाड़ियों के विकास की बात करने वाले मंत्रियों के दावों की पोल खुल जाती है।

यह कहानी है देवा कीः-

- 29 वर्षीय देवा ने 2000 से 2008 के बीच नेशनल स्कूल कबड्डी में दो और जेवेलिन थ्रो में एक स्वर्ण पदक जीता है।

- डिस्कस थ्रो और कबड्डी में एक-एक रजत पदक भी जीत चुकी है।

- देवा उदयपुर में चल रही दूसरी राज्य स्तरीय जनजाति प्रतियोगिता में प्रतापगढ़ छात्रावास की टीम के साथ आई हैं।

- इनके नेतृत्व में प्रतापगढ़ कबड्डी टीम अगले दौर में पहुंच चुकी है।

- कई खेलों में बेहतर प्रदर्शन करने और पढ़ाई में भी अव्वल होने के बावजूद भी इस उभरते खिलाड़ी की ओर किसी का ध्यान नहीं दिया।

- नेशनल कबड्‌डी में दो, जेवलीन में जीत चुकी एक गोल्ड, सपना था अतरराष्ट्रीय खेलना

- देवा बताती हैं कि खेल के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच खेलना उसका सपना था लेकिन घर की आर्थिक स्थिति ने आगे नहीं बढ़ने दिया।

- देवा के पिता भी मजदूरी का काम करते हैं। लेकिन उनकी तबीयत अब अक्सर खराब होने की वजह से परिवार की पूरी जिम्मेदारी देवा पर ही है।

- देवा के अलावा परिवार में 8 छोटे भाई-बहन हैं। वह परिवार चलाने के लिए मजदूरी कर रोजाना 100-200 रुपए जुटाती है।

- इससे छोटे भाई बहनों की फीस के साथ घर भी चलता है। इतनी जिम्मेदारी होने के बाद भी वह खेल से जुड़ा लगाव खत्म नहीं कर पाती और खेलों में आज भी भाग लेती हैं।

- वह अब गांवों में लड़कियों को कबड्डी की ट्रेनिंग देकर ग्रामीण प्रतिभाओं को निखारना चाहती है।