वाराणसी: देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल से इन राज्यों को होगा फायदा

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली ( 12 नवंबर ): वाराणसी पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रामनगर में बने देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र के नाम समर्पित किया। मल्टी मॉडल टर्मिनल के उद्घाटन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हेलीकॉप्टर गंगा में बने जेटी पर उतरा। यहां से वो पैदल चलते हुए बंदरगाह के टर्मिनल पर पहुंचे। 

वाराणसी के खिड़किया घाट पर पीएम मोदी ने सीएम योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के साथ देश के पहले मल्टी मॉडल टर्मिनल को राष्ट्र को समर्पित किया। इस दौरान उन्होंने मालवाहक जहाज 'टैगोर' से कंटेनर अनलोडिंग की शुरुआत भी की।   

पीएम द्वारा उद्घाटित वाराणसी के मल्टी मॉडल टर्मिनल को 206 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है। टर्मिनल की 200 मीटर लंबी और 45 मीटर चौड़ी जेटी पर माल की लोडिंग तथा अनलोडिंग के लिए दुनिया की अत्‍याधुनिक हैवी क्रेन लगाई गई है। जर्मनी में तैयार हुई मोबाइल हार्बर क्रेन की कीमत 28 करोड़ रुपये है।   

टर्मिनल के शुरू होने से गंगा के रास्ते कारोबार का नया युग शुरू होगा। आपको बता दें कि प्रयागराज-हल्दिया जलमार्ग की कुल दूरी 1620 किमी है। यह देश का सबसे लंबा जलमार्ग होगा। बताया जाता है कि आजादी के पहले इस रूट पर कारोबार होता था।  


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1986 में इसे सरकार ने दोबारा शुरू करने की योजना बनाई थी, जो पूरी नहीं हो सकी। इसके बाद मोदी सरकार इसे साकार कर रही है। इस योजना की सबसे ख़ास बात यह है कि यह देश के चार राज्यों को जोड़ेगा। इनमें पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश हैं। इन चार राज्यों में 20 टर्मिनल हैं, जिनमें से 18 फ्लोटिंग हैं। इस जलमार्ग की क्षमता 12 लाख टन है।  

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गौरतलब है कि सरकार ने वॉटर-वे एक्ट 2016 के तहत देश में 111 जलमार्गों को नेशनल वॉटर वे घोषित किया गया है। इनकी कुल दूरी 14500 किमी है। इस पूरे जलमार्ग के साकार होने पर एक लाख 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। यही नहीं, अब गंगा के रास्ते व्यापारिक गतिविधियां जुड़ने से उत्तर भारत और पूर्वोत्तर भारत, बांग्लादेश, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड और अन्य दक्षिण एशियाई देशों से जुड़ जाएगा।