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2019 में केंद्र और राज्य के चुनाव एक साथ होने के आसार, चुनाव आयोग ने शुरू की तैयारी !

नई दिल्ली (6 जनवरी): 2019 में देश में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव एकसाथ हो सकते हैं। सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक देश में तमाम चुनावों को एकसाथ कराए जाने की बढ़ती मांग के बीच चुनाव आयोग ने अपनी तरफ से तैयारी भी शुरू कर दी है।

आपको बता दें कि  31 दिसंबर को राष्ट्र के नाम अपने संदेश में पीएम मोदी की तरफ से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने के सुझाव के बाद चुनाव आयोग दोनों चुनाव एक साथ कराए जाने की संभावना को देखते हुए अपनी तैयारियों में अभी से जुट गया है। हालांकि, इसको लेकर फिलहाल अभी संविधान में संशोधन की दिशा में कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।

सूत्रों से मिल रही जानकारी के मुताबिक अगर इस मुद्दे पर तमाम बड़ी पार्टी एकमत हो जाती है तो 2019 के आस-पास होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों को लोकसभा के साथ कराया जा सकता है। इस दौरान 19 राज्यों के चुनाव लोकसभा चुनाव के साथ कराने की संभावना बनती है।

बाकी राज्यों के चुनाव 2021 में हो सकते हैं। बिहार में नवंबर-दिसंबर, 2015 में चुनाव हुए हैं, इसलिए वहां के चुनाव 2021 में जिन राज्यों में चुनाव होने हैं, उनके साथ हो सकते हैं। इसी प्रकार एक-दो चरणों के बाद सभी विधानसभाओं के चुनाव लोकसभा के साथ हो सकेंगे।

क्यों जरूरी है एक साथ चुनाव...

- चुनावआयोग के अनुसार लोकसभा, विधानसभा यूनियन टेरटरीज के चुनाव में 4500 करोड़ रुपये का खर्च आता है। एक साथ चुनाव होने पर इसमें कमी सकती है।

- चुनाव आचार संहिता लागू होने से विकास कार्य ठप हो जाते हैं। यहां तक की सामान्य कार्य भी प्रभावित होते हैं। कई राज्यों में महीनों तक आचार संहिता लागू रहती है।

- बार-बार चुनाव होने से सरकार की नई पॉलिसी भी फेल हो सकती है।

- जरूरी सेवाएं भी प्रभावित होती है। पॉलिटिकल रैलियों से जाम लगते हैं। ध्वनि प्रदूषण भी होता है।

- मैनपावर चुनाव में ही लगे रहते हैं। हर चुनाव में कर्मचारियों को इधर-उधर लगाया जाता है, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।


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