नाथुराम गोडसे के परिवार का दावा, गोडसे ने कभी नहीं छोड़ी RSS

नई दिल्ली (8 सितंबर): महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे ने दावा किया है कि RSS चाहे जो भी कहे लेकिन वह संघ का कट्टर सदस्य था।

गोडसे के परिवार का कहना है कि जीवन के आखिरी वर्षों में उसने भले ही RSS की आलोचना की हो, लेकिन हिंदुओं पर अत्याचारों के लिए हैदराबाद के निजाम के 1938 में विरोध में उसने RSS सदस्यों का साथ दिया था।

- नाथूराम गोडसे 1930 के दशक की शुरुआत तक RSS का समर्पित सदस्य था। - इसके बाद वह संघ की कट्टरता में कथित तौर पर कमी आने की वजह से उससे कुछ दूर हो गया था। - नाथूराम का मानना था कि हिंदुओं पर अत्याचार होने के बावजूद RSS आक्रामक रुख नहीं अपना रहा था। - उन्होंने हैदराबाद के निजाम के खिलाफ भाग्यपुर में 1938-39 में 'मुक्ति संग्राम' में हिस्सा लिया था।

- नाथूरामजी इस्लामिक राज्य के पूरी तरह खिलाफ थे, जो निजाम हैदराबाद में स्थापित करना चाहते थे। - RSS के साथ मतभेदों के बावजूद नाथूराम का माना था कि निजाम के शासन के खिलाफ स्वयंसेवकों के संघर्ष को समर्थन देने की जरूरत है।

RSS यह कहता रहा है कि महात्मा गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे ने 1949 में इस हत्या को अंजाम देने से काफी पहले संगठन छोड़ दिया था।