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NASA के टूल का अनुमान, डूब सकती है मुंबई

नई दिल्ली ( 16 नवंबर ): अब आसानी से पता लगाया जा सकता है कि किन शहरों पर बाढ़ पर खतरा अधिक है। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसा ही टूल तैयार किया है जिसके जरिए यह पता लगाया जा सकेगा कि ग्लोबल वॉर्मिंग के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की स्थिति में दुनिया के किन शहरों पर बाढ़ का खतरा सबसे ज्यादा होगा। 

ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर के पिघलने से समुद्र में पानी का स्तर बढ़ जाता है। लेकिन बर्फ के पिघलने से किस स्थानीय समुद्र के तटीय शहरों में कौन सा शहर प्रभावित होगा यह जानना एक बड़ा सवाल है। इसी सवाल का उत्तर जानने के लिए नासा के वैज्ञानिकों ने इस टूल को विकसित किया है जो इसकी भविष्यवाणी कर देगा कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण किस तटीय शहर में बाढ़ पहले आएगी।

इस टूल का नाम है ग्रैडिएंट फिंगरप्रिंट मैपिंग (GFM)। नासा के जेट प्रोप्यूलेशन लेबोट्ररी, कैलेफॉर्निया के शोधकर्ताओं के अनुसार इस टूल का इस्तेमाल 293 प्रमुख शहरों पर किया गया है इन शहरों में कर्नाटक का मैंगलुरु भी शामिल है।  

शोधकर्ताओं के अनुसार इस टूल का इस्तेमाल 293 प्रमुख शहरों पर किया गया है। इन शहरों में भारत के कर्नाटक का मेंगलुरु शहर भी शामिल है। मेंगलुरु को इस मामले में काफी संवेदनशील बताया गया है। ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक आइसशीट के लगभग सभी क्षेत्रों में बर्फ की मोटाई में आने वाले परिवर्तन से मेंगलुरु प्रभावित होगा। खास बात यह है कि खतरे के स्तर के मामले में मेंगलुरु मुंबई और न्यूयॉर्क जैसे शहरों से कहीं आगे है। 

ऐसे काम करेगा टूल दऱअसल ये टूल संवेदनशीलता पर काम करेगा। आपको बता दें कि दुनिया का 75 फीसदी फ्रेश वॉटर ग्लेशियर में जमा है। जिसमें ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका के ग्लेशियर शामिल हैं। इस टूल की मदद से पता लगता है कि स्थानीय समु्द्र का स्तर कितना सेंसेविटी हुआ है यानी आईसशीट में कितना बदलाव आया है और उसकी मोटाई कितनी है। यह भी बताएगा कि कितनी आईसशीट कम हो गई है। 

सेंसेविटी को ग्रैडिएंट्स की टर्म में मापा जाएगा। जो हैं dS/dH (-4 से -2, -2 से 0, 0 से 2, 2 से 4)।


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