मंगल ग्रह पर पहली बार NASA की ये महिला वैज्ञानिक रखेंगी कदम!

नई दिल्ली (14 जनवरी): नासा केवल 15 सालों के भीतर इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने की योजना बना रहा है। स्पेस एजेंसी का यह मिशन चंद्रमा के मिशन्स से अलग कई मायनों में खास होगा। इसकी एक वजह है, कि नासा के जिन अंतरिक्षयात्रियों की रेड प्लैनेट पर पहुंचने की उम्मीद है, उनमें 50 फीसदी महिलाएं होंगी।

'मेलऑनलाइन' की रिपोर्ट के मुताबिक, जिन महिला वैज्ञानिकों की मंगल पर पहुंचने की उम्मीद है, उनमें निकोल मान, एनी मैक्क्लैन, जेसिका मीर और क्रिस्टीना हैमक कोच हैं। ये चारों अग्रणी महिला वैज्ञानिक स्पेस इंडस्ट्री की शक्ल बदलने में लगी हुई हैं। इस टीम ने हाल ही में 'ग्लैमर' मैगजीन को हॉस्टन स्थित नासा की फैसिलिटीस में अपनी ट्रेनिंग के बारे खास जानकारी दी, कि किस तरह वे 'डीप स्पेस ट्रैवल' के लिए तैयारी में जुटी हुई हैं।

36 वर्षीय मैक्क्लेन ने रिपोर्टर गिनी ग्रेव्स को बताया, ''मुझे अभी भी याद आता है, मुझे कॉल कर बताया गया कि मेरा चयन हो गया है। मैं सांस भी नहीं ले सकी, मैं बात नहीं कर पाई, मैं रोने लगी।'' मैक्क्लेन 15 महीनों तक ईराक में फ्लाइंग कर चुकी हैं। उन्होंने बताया, उन्होंने आर्मी ड्यूटी के सेंस की वजह से ज्वाइन किया था। लेकिन अंतरिक्ष यात्री बनने की चाहत जैसे उनकी किस्मत थी। वह कहती हैं, ''दुनिया में बहुत संघर्ष है, ऐसे में स्पेस एक्सप्लोरेशन उम्मीद की किरण हो सकती है।''

मैक्क्लेन की 38 वर्षीय क्लासमेट जेसिका मीर एक छोटे से कस्बे 'मैने' में जन्म हुआ। इस वजह से उनका हमेशा दूर दराज के इलाकों में आना जाना रहा। हालांकि, 37 वर्षीय क्रिस्टीना हैमॉक कोच कहती हैं, कि वह हमेशा से जानती थीं कि वह एक अंतरिक्षयात्री बनना चाहती थीं। जब वह छोटी थी तभी उन्हें भरोसा था कि वह एक दिन नासा के लिए काम कर रही होंगी।

निकोल कहती हैं, ''मैं शायद उन कुछ अंतरिक्षयात्रियों में से हूं, जिसे बचपन में नहीं पता था, कि वह क्या बनना चाहती थीं। एस्ट्रॉनॉट बनना एक बहुत दूर का ख्वाब लगता है।'' कैलीफोर्निया की रहने वाली निकोल ने ईराक में मैरीन कॉर्प्स के साथ फाइटर जेट्स उड़ाने से पहले इसका एहसास भी नहीं किया था, कि वह भी एक अच्छी कैंडिडेट हो सकती है।

गौरतलब है, मंगल ना केवल नासा बल्कि प्राइवेट ग्रुप्स जैसे स्पेस एक्स के लिए भी अगला बड़ा लक्ष्य है। रूस, चीन और यूरोप का भी रूझान इस तरफ है। यह मिशन इतिहास में सबसे ज्यादा दूरी का होने के साथ सबसे ज्यादा महात्वाकांक्षी स्पेस मिशन है। यहां पहुंचने के लिए 6 से 9 महीनों का समय लगेगा, जबकि, राउंट ट्रिप में 2 से 3 साल लगेंगे।

इस मिशन के लिए एस्ट्रोनॉट्स को धूल भरे तूफानों, फ्रीजिंग टैम्प्रेचर्स और कैंसर पैदा करने वाले रेडिएशन का भी पता लगाना होगा। इस प्रोजेक्ट के कई फायदे होंगे। मीर ने 'ग्लैमर' को बताया, ''मंगल ग्रह हमें हमारे ग्रह के भी भूतकाल, वर्तमान और भविष्य काफी कुछ सिखा सकता है। वह अद्भुत चीज होगी।''

* बाएं से दाएं (निकोल मान, एनी मैक्क्लेन, जेसिका मीर और क्रिस्टीना हैमॉक)