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नयी टेक्नोलॉजी-नये सिस्टम को लेकर चांद पर जायेंगे, रुकेंगे और खोज करेंगे

नासा के चीफ जिम ब्राइडेनस्टाइन ने ऐसा ऐलान किया है जिससे दुनिया भर के खगोलविदों की उत्सुकता को बढ़ा दिया है। नासा चीफ ने कहा है कि इस बार उनका मिशन न केवल चांद पर जायेगा बल्कि वहां रुक कर ऐसे अनुसंधान करेगा जिसपर हमारी दुनिया गर्व करेगी

न्यूज24 ब्यूरो (10 फरवरी): नासा के चीफ जिम ब्राइडेनस्टाइन ने ऐसा ऐलान किया है जिससे दुनिया भर के खगोलविदों की उत्सुकता को बढ़ा दिया है। नासा चीफ ने कहा है कि इस बार उनका मिशन न केवल चांद पर जायेगा बल्कि वहां रुक कर ऐसे अनुसंधान करेगा जिसपर हमारी दुनिया गर्व करेगी। दरअसल कुछ लोगों ने नासा के पहले मून मिशन पर सवाल खड़े किये थे।

 ऐसा माना जा रहा है कि ब्राइडेनस्टाइन का ऐलान उन आलोचकों को एक जवाब भी है। इसके अलावा ऐसा भी कहा जा रहा है कि यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) ने भी मून मिशन प्रोजेक्ट तैयार किया है। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य 2025 तक चांद पर पानी और ऑक्सीजन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। ब्राइडेनस्टाइन के नये मिशन पर अगले हफ्ते से काम शुरु होजाने की संभावना है। ब्राइडेनस्टाइन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर पहली व्यासायिक लेंडिंग 2020 के अंत करना है। 

ब्राइडेनस्टाइन ने कहा है इस बार हम चंद्रमा पर नयी और अत्याधुनिक सिस्सटम और टैक्नोलॉजी के साथ जा रहे हैं। हम इस बार चांद की ऐसी नई जगहों को खोज निकालने की कोशिश करेंगे जिन के बारे में शायद ही किसी ने आज तक सोचा हो। उन्होंने कहा निसंदेह इस बार हम चांद पर जायेंगे वहां रुकेंगे और नयी खोज करके वापस लौटेंगे। नासा का कहना है कि चंद्रमा की सतह महत्वपूर्ण पड़ाव तथा प्रौद्योगिकी के परीक्षण के लिए अहम स्थान का भी काम कर सकती है, जहां से भविष्य में मंगल और बाह्य अंतरिक्ष के सुदूर क्षेत्रों में इंसानों को भेजने की तैयारी की जाएगी। 

नासा चीफ ने कहा है कि प्रशासन और अमेरिकी कांग्रेस (संसद) के मार्गदर्शन के तहत नासा का चीन के साथ सहयोग पारदर्शी, पारस्परिक और आपसी फायदे का है। दरअसल, चीन ने अपने स्पेस यान को चंद्रमा के अंधेरे हिस्से में उतार कर इतिहास रचा था। नासा चीनी स्पेस अभियान से प्रभावित है। इसीलिए उसके साथ मिलकर आगे काम करने की योजना बनायी जा रही है।

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