NSG की कवायद के लिए ताशकंद दौरे पर जा रहे हैं PM मोदी

प्रभाकर मिश्रा, नई दिल्ली (22 जून): एक के बाद एक NSG के लिए दुनिया के देशों का समर्थन मिलने से पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाया गया है... पाकिस्तान की संसद में ये दावा किया गया है कि  चीन के साथ मिलकर उसने भारत के बड़े सपने को झटका दे दिया है। इसलिए अब सियोल में 23 और 24 जून को होने वाली NSG की मीटिंग, भारत की कोशिशों के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है।

सियोल में भारत के लिए बड़ा दिन है। सियोल में होने वाली मीटिंग पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है। बड़ा भारत को न्युक्लियर सप्लायर ग्रुप की सदस्यता मिलेगी या कामयाब हो जाएगी चीन और पाकिस्तान की साजिश? सियोल में 23 और 24 जून को होने वाली NSG की बैठक में भारत की सदस्यता पर बात होने की पूरी संभावना है।

सिओल में न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप यानी NSG देशों की मीटिंग से पहले भारत को लगातार एक के बाद एक देशों का सपोर्ट मिल रहा है। अब फ्रांस ने भी भारत के मेंबरशिप की वकालत की है। लेकिन भारत को मिल रहे चौतरफा सपोर्ट से पाकिस्तान बुरी तरह बौखलाया हुआ है। पाकिस्तान के टॉप फॉरेन अफेयर्स एडवाइजर सरताज अजीज ने पाकिस्तान की संसद में कहा है कि पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर NSG में भारत के दावे को खत्म कर दिया है।   जाहिर है पाकिस्तान चीन के दम पर इस तरह का दावा कर रहा है। अगर भारत को NSG की सदस्यता मिलती है तो हम उस एलीट न्युक्लियर ग्रुप में शामिल हो जाएंगे जिसमें फिलहाल दुनिया के केवल 48 देश हैं। भारत का एनएसजी में शामिल होना कितना जरूरी है यह इसी बात से समझा जा सकता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस देश में जा रहे हैं वहां एनएसजी की सदस्यता के लिए समर्थन जुटा रहे हैं। लेकिन चीन भारत के रास्ते की सबसे बड़ी रुकावट बना हुआ है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन की बैठक में शामिल होने ताशकंद जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग से भी होगी। पीएम मोदी NSG पर चीन का समर्थन हासिल करने की कोशिश करेंगे। लेकिन चीन को मनाना इतना आसान नहीं है। दुनिया भर के सपोर्ट के बीच चीन भारत को रोक पाएगा ये तो मुश्किल है। लेकिन चीन इस प्रोसेस में देरी जरूर करवा सकता है।

क्या है NSG

NSG न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप 48 देशों का संगठन है।  NSG देश परमाणु ईंधन, उससे जुड़े साज़ो सामान और तकनीक पर नियंत्रण रखते हैं। NPT पर दस्तख़त करने वालों से ही कारोबार 1974 के पोकरण परमाणु परीक्षण के बाद NSG का गठन हुआ

NSG के 48 में से ज्यादातर देश भारत की सदस्यता के समर्थन में हैं। परमाणु अप्रसार में भारत का ठोस रिकॉर्ड दावेदारी को और मजबूत करता है। लेकिन चीन भारत को सदस्य बनाने के ख़िलाफ़ है। चीन का तर्क है कि भारत ने NPT पर दस्तख़त नहीं किए हैं। चीन के साथ नॉर्वे, न्यूज़ीलैंड और द. अफ्रीका को भी भारत के इस एलीट ग्रुप में शामिल होने पर ऐतराज़ है। ऐसे में देखना ये है कि अमेरिका के साथ NSG के ज्यादातर देशों का सपोर्ट क्या रंग लाता है।