आखिर पीएम मोदी को क्यों जाना पड़ा काल भैरव के दर पर...

नई दिल्ली(4 मार्च): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में हैं। वे उत्तर प्रदेश चुनाव के आखिरी चरण के लिए प्रचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने आज काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके अलावा पीएम मोदी काल भैराव मंदिर भी पहुंचे। पीएम का रोड शो यहीं पर खत्म हुआ। आपको बता दें यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री मोदी ने काल भैरव मंदिर में पूजा अर्चना की।

आइए आपको बताते हैं इस मंदिर से जुड़ी मान्यताएं...

- माना जाता है कि भगवान विश्वनाथ बनारस के राजा हैं और काल भैरव इन प्राचीन नगरी के कोतवाल।

   

- यूपी के वाराणसी के मैदागिन में काल भैरव का एक मंदिर है। जिन्हें काशी का 'कोतवाल' कहा जाता है।

   

- मान्‍यता है कि बिना इनकी इजाजत के कोई सीमा में न प्रवेश कर सकता है और न ही यहां रह सकता है।

   

- यहां तक कि कोई भी प्रशासनिक अधिकारी चार्ज लेने के बाद सबसे पहले यहीं मत्था टेकने आता है।

   

- स्थानीय लोगों का कहना है कि काशी विश्वनाथ के बाद यदि कोई काल भैरव का दर्शन नहीं करता है तो उसकी पूजा अधूरी रहती है।

   

- बताया जा रहा है, शायद यही कारण है कि मोदी ने इस बार काल भैरव दर्शन करने का भी फैसला किया है।

   

- इससे पहले 2014 के लोकसभा चुनावों में जीत के बाद उन्होंने काशी विश्वनाथ के दर्शन किए थे।

   

- वैसे मान्यता यह भी है कि बाबा विश्वनाथ के इस शहर में रहने के लिए बाबा काल भैरव की इजाजत लेना जरूरी होती है।

- मार्गशीष महीने के कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी को यहां रात में बाबा काल भैरव की सवा लाख बत्ती से महाआरती की जाती है।

- इस मंदिर के महंत-पंडित राजेश मिश्रा ने बताया कि बाबा विश्वनाथ के बाद बाबा काल भैरव का सबसे बड़ा स्थान है।

- वे इस शहर के राजा हैं और बाबा काल भैरव इस शहर के सेनापति हैं।

- उन्‍होंने बताया कि बाबा भैरव ने जब काल भैरव का रूप धारण किया तो नेत्रों से क्रोधाग्नि प्रज्वलित हो रही थी।

- इस अग्नि से लोगों को बचाने के लिए शिव जी ने काल भैरव से बोला कि अपना मुख महाश्मशान मणिकर्णिका की ओर करिए।

- तब से लेकर आज तक श्‍मशान की अग्नि बुझी नहीं है।

- वरिष्ठ अधिकारी विभिन्न पुलिस थानों का निरीक्षण करते हैं, लेकिन वाराणसी में काल भैरव के पास वाले थाने का कभी किसी अधिकारी ने निरीक्षण नहीं किया।

- मान्यता है कि यहां काल भैरव स्वयं निरीक्षण करते हैं। कोई बड़ा स्थानीय अधिकारी भी इस चौकी में नहीं जाता है। बनारस के लोगों का मानना है कि बाबा विश्वनाथ और उनका भगवान तथा भक्त का नहीं, राजा और प्रजा का रिश्ता है।

- पंडित राजेश मिश्रा ने बताया कि ब्रह्मा ने शिव की एक मुख से निंदा की थी। इससे नाराज कालभैरव ने ब्रह्मा का मुख ही अपने नाखून से काट दिया था।

- कालभैरव का नाखून ब्रह्मा के मुख में चिपका रह गया, जो हट नहीं रहा था।

- भैरव ब्रम्‍हत्‍या से मुक्ति पाने के लिए भगवान विष्णु की शरण में गए। उन्‍होंने कालभैरव को काशी भेजा।

- काशी पहुंच कर उन्हें ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति मिली और उसके बाद वे यहीं स्थापित हो गए।

- इसका जिक्र पुराणों में भी मिलता है।