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पीएम को ही मिलेगी एसपीजी सुरक्षा, मोदी सरकार संसद सत्र में लाएगी बिल

केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाने के लिए कांग्रेस नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार पर लगातार हमलावर है। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने यह मामला गंभीरता से उठाया था।

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न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली(22 नवंबर): केंद्र सरकार (Central Government) द्वारा गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाने के लिए कांग्रेस नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार पर लगातार हमलावर है। संसद के शीतकालीन सत्र के पहले ही दिन कांग्रेस ने यह मामला गंभीरता से उठाया था। इस बीच खबर है कि सरकार संसद के मौजूदा सत्र में एसपीजी संशोधन विधेयक भी पेश कर सकती है। एसपीजी संशोधन विधेयक से जुड़ी जानकारी के मुताबिक यह विधेयक एसपीजी सुरक्षा को केवल प्रधानमंत्री (Prime Minister) तक सीमित रखने पर केंद्रित होगा। बता दें कि गांधी परिवार से एसपीजी सुरक्षा वापस लेने पर कांग्रेस ने सत्र के पहले ही दिन नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) सरकार को घेरने की कोशिश की थी और भारी हंगामा किया था।

सरकार ने कहा, इसमें कुछ भी राजनीतिक नहींं

लोकसभा में कांग्रेस की ओर से इस मसले को जोरदार तरीके से उठाया गया। कांग्रेस सांसदों का आरोप है कि सरकार बदले की भावना से काम कर रही है, वहीं सरकार की ओर से यह कहा गया है कि इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है।

दूसरे दिन शून्यकाल में कांग्रेस का हंगामा

शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन शून्यकाल के दौरान कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने उठाया गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने का मसला। आसन ने इस विषय से भी इनकार कर दिया, उन्होंने कहा कि नियम के मुताबिक विषय लाएं। इसके बाद हंगामे के बीच गांधी परिवार की एसपीजी सुरक्षा हटाए जाने के मुद्दे को लेकर कांग्रेस के सांसदों ने लोकसभा से वॉक आउट भी कर लिया था।

आनंद शर्मा ने राज्यसभा में उठाया मुद्दा

शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन बुधवार को राज्यसभा में इसी मुद्दे को आनंद शर्मा ने उठाया. आनंद शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार से गुजारिश है कि हमारे नेताओं की सुरक्षा राजनीति से अलग रखें. सुब्रमण्यम स्वामी ने आनंद शर्मा को जवाब देते हुए कहा कि गृह मंत्रालय लगातार खतरे का आकलन करता है. यह उसी आधार पर हुआ. यूपीए सरकार के समय भी कई नेताओं की सुरक्षा कम की गई थी.

वहीं इस मामले पर बोलते हुए जे पी नड्डा कहा कि इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है. सुरक्षा हटाई नहीं गई है. गृह मंत्रालय के पास एक नियमावली है और प्रोटोकॉल है. यह किसी राजनेता द्वारा नहीं बल्कि गृह मंत्रालय द्वारा किया गया है.

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