लंदन में पीएम मोदी के 'भारत की बात सबके साथ' की खास बातें

लंदन(18 अप्रैल): ब्रिटेन के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंदन में भारत की बात सबके साथ कर रहे हैं। प्रधानमंत्री के साथ गीतकार और लेखक प्रसून जोशी उनसे बात कर रहे हैं। कार्यक्रम का आयोजन सेंट्रल हॉल वेस्टमिंस्टर में हो रहा है। यहां पर उन्हें सुनने के लिए काफी संख्या में लोग मौजूद हैं, जिन्हें इस कार्यक्रम के लिए पास जारी किया गया है।

पीएम मोदी के भारत की बात की खास बातें...

- रेलवे स्टेशन मेरी जिंदगी और मेरे संघर्ष का स्वर्णिम पृष्ठ है। रेल की पटरियों और आवाज से बहुत कुछ सीखा है।

- लोकतंत्र का ही कमाल है कि आज रॉयल हॉल में एक चाय बेचने वालों का प्रतिनिधि बनकर रॉयल पैलेस में आ सकता है। लोकतंत्र में जनता ईश्वर का रूप है।

- मैं आदिशंकर के अद्वैत सिद्धांत को जानता हूं- जहां मैं नहीं तू ही तू है। जहां द्वय नहीं है, वहां द्वंद्व नहीं है। इसलिए मैं अपने भीतर के नरेंद्र मोदी को लेकर जाता हूं तो देश के साथ अन्याय होगा। देश के साथ न्याय के लिए मुझे अपने आप को भुलाना होगा। वट वृक्ष को पनपाने वाला बीज भी आखिरकार खप ही जाता है।

- संतोष के भाव से विकास नहीं होता है। मकसद गति देता है नहीं है तो जिंदगी रूक जाती है। बेसब्री तरुणाई की पहचान है और यह आपमें नहीं है तो आप बुजुर्ग हो चुके हैं। बेसब्री ही विकास का बीज बोता है। बेसब्री को मैं बुरा नहीं मानता।

- आज सवा सौ करोड़ देशवासियों के मन में उत्साह है। एक कालखंड था कि लोगों के मन में ऐसा विचार था कि अब कुछ होने वाला नहीं। हमने ऐसा माहौल बनाया कि लोग हमसे ज्यादा उम्मीद करने लगे हैं। 

-पहले अकाल की स्थिति पैदा होती थी तो लोग सरकारी दफ्तर में जाकर कहते थे कि हमारे गांवों में मिट्टी खोदने का काम दीजिएगा ताकि कुछ रोजगार मिले और सड़क भी बन जाए।

- जहां तक निराशा का सवाल है, मैं समझता हूं कि जब खुद के लिए कुछ लेना बनना पाना होता है, तब वह आशा से जुड़ जाता है।

- ‘तब और अब’ में जमीन-आसमान का अंतर होता है क्योंकि जब नीति स्पष्ट हो, नीयत साफ हो, और इरादे नेक हों तो उसी व्यवस्था के साथ आप इच्छित परिणाम ले सकते हैं।

- आयुष्मान भारत के बारे में कहा कि तीन बातों पर मेरा जोर रहा है। मैं बड़ी बातें नहीं करता हूं। बच्चों को पढ़ाई, युवा को कमाई, बुजुर्ग को दवाई, ये चीजें हैं जो स्वस्थ समाज के लिए होनी चाहिए। अच्छे खासे परिवार में भी अगर एक बीमारी आ जाए तो सभी योजनाएं, बेटी की शादी की तैयारी धरी की धरी रह जाती है। ऑटो रिक्शा चलाने वाला बीमार हो जाए तो पूरा परिवार बीमार हो जाता है।

- मेरे भीतर एक विद्यार्थी है. मैंने उसे कभी मरने नहीं दिया और मुझे जो दायित्व मिलता है। उसे सीखने की कोशिश करता हूं। मेरे पास अनुभव नहीं है। मुझसे गलतियां हो सकती हैं, लेकिन बद इरादे से गलत कभी नहीं करूंगा। लंबे समय तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। प्रधानसेवक का तमगा मुझे मिला है। लेकिन गलत इरादे से कोई काम नहीं करूंगा, मैंने कभी ये नहीं सोचा कि मैं देश बदल दूंगा। लेकिन सोचता हूं कि अगर देश में लाखों समस्याएं हैं, तो सवा सौ करोड़ समाधान हैं।

- आयुष्मान भारत में हम देश में करीब डेढ़ लाख से ज्यादा वेलनेस सेंटर बनाना चाहते हैं। एक सेंटर से 12-15 गांवों को फायदा मिले। दूसरा- योग, पोषण मिशन से प्रिवेंटिव हेल्थ को बल मिले। दुनिया के कई देशों में मातृत्व अवकाश के लिए उतनी उदारता नहीं है, जितनी हमारे यहां है। हमने 26 हफ्ते का अवकाश दिया है। भारत की आधी आबादी यानी 50 लाख लोगों को 5 लाख रुपये तक का बीमा सरकार देगी। टीयर-टू और थ्री सिटी में अच्छे प्राइवेट अस्पतालों का नेटवर्क खड़ा होगा। नई चेन बनेगी। 1 हजार से ज्यादा अच्छे और नए अस्पताल बनने की संभावना है।