पीएसयू में भी क्रीमी लेयर होगा लागू: अरुण जेटली

नई दिल्ली ( 30 अगस्त ): ओबीसी (अन्‍य पिछड़ी जातियां) क्रीमी लेयर की आय सीमा को 6 लाख से 8 लाख रुपये करने के फैसले का लाभ पीएसयू, सरकारी बैंक और इंश्‍योरेंस सेक्टर में काम करने वाले ओबीसी वर्कर्स को भी मिलेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्‍यक्षता में बुद्धवार को हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया। 

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को कैबिनेट की बैठक के बाद इस फैसले की जानकारी मीडिया को दी। उन्होंने बताया कि पिछली बैठक में केंद्रीय कैबिनेट ने ओबीसी आरक्षण के लिए क्रीमी लेयर की आय सीमा को बढ़ा दिया था। आठ लाख रुपये सालाना तक कमाने वाली अन्य पिछड़ी जातियां (OBC) क्रीमी लेयरदायरे से बाहर आती हैं और उन्हें आरक्षण का लाभ नौकरियों में दिया जा सकता है। पहले यह सीमा छह लाख रुपये सालाना थी। सरकार के नये फैसले की वजह से अब ओबीसी वर्ग के ज्यादा लोगों को नौकरियों और भर्तियों में आरक्षण का फायदा मिल सकेगा।

जेटली ने बताया कि ओबीसी की सूची में सब-कैटिगरी बनाने की दिशा में एक आयोग का गठन करने के लिए राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजी गयी है। इससे, लाभ पाने से वंचित रह जाने वाले लोगों को भी शामिल किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने क्रीमी लेयर को फिर से परिभाषित करने की मंशा जाहिर की थी, ताकि इसका फायदा जरूरतमंद और समाज के निचले तबके तक पहुंचाया जा सके. इससे पहले ओबीसी आरक्षण के लिए आखिरी समीक्षा 2013 में की गयी थी। 

क्या है क्रीमीलेयर?
क्रीमी लेयर में आने वाले पिछड़ा वर्ग के लोग आरक्षण के दायरे से बाहर हो जाते हैं> सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में ओबीसी के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण है, बशर्ते परिवार की वार्षिक आय क्रीमी लेयर के दायरे में न आती हो> अभी तक वार्षिक आय छह लाख रुपये तक थी, अब यह 8 लाख रुपये कर दी गयी है। यानी इससे जिनकी आय अधिक होती है उन्हें क्रीमी लेयर कहा जाता है और वे आरक्षण के लिए पात्र नहीं होते।