अयोध्या विवाद: नवंबर में ही सुलह का फॉर्म्युला?

नई दिल्ली ( 13 नवंबर ): अयोध्या मसले के शांतिपूर्ण समाधान के लिए चल रही सुलह की कोशिशों तेज हो गई हैं। इस बीच अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष नरेंद्र गिरि ने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर मुद्दे को लेकर शिया वक्फ बोर्ड के साथ सुलह समझौते में गतिरोध लगभग दूर हो गया है और समझौते का मसौदा 15-16 नवंबर तक उच्चतम न्यायालय में दाखिल कर दिया जाएगा। इलाहाबाद के बाघंबरी गद्दी में शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी के साथ बैठक के बाद गिरि ने संवाददाताओं को बताया कि अयोध्या में शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष के साथ बातचीत हुई थी जिसमें एक बिंदु पर आपत्ति की थी कि मस्जिद अयोध्या में बनाई जाए या फैजाबाद में। हमने इसका विरोध किया था। रिजवी साहब ने यह आपत्ति आज दूर कर दी। 

उन्होंने कहा कि हमारी बातचीत मुख्य पक्षकार धर्मदास एवं अन्य लोगों से हुई है। समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर होने के बाद इसे न्यायालय में दाखिल किया जाएगा। पूरी उम्मीद है कि इसे 15-16 नवंबर तक न्यायालय में दाखिल कर देंगे। बैठक के बाद शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष रिजवी ने कहा कि यह बात तय हो गई है कि अयोध्या या फैजाबाद में किसी नई मस्जिद का निर्माण नहीं होगा। किसी मुस्लिम आबादी वाले क्षेत्र में मस्जिद के लिए जगह चिह्नित कर शिया वक्फ बोर्ड सरकार को अवगत कराएगा। अब इस मामले में मध्यस्थता करने की किसी को भी जरूरत नहीं है।

रिजवी ने कहा कि मंदिर निर्माण पक्षकार और शिया वक्फ बोर्ड इस बात पर पूरी तरह सहमत हो गया है। न्यायालय में जितने पक्षकार हैं, उनसे भी हमारी बातचीत लगभग हो गई है। पांच दिसंबर से पूर्व हम आपसी सुलह समझौते की जो बातचीत हुई है उसे उच्चतम न्यायालय में दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि चूंकि सुन्नी वक्फ बोर्ड अपने पंजीकरण का दावा कई जगह से हार चुका है, यह शिया वक्फ की मस्जिद थी, लिहाजा इसमें सिर्फ शिया वक्फ बोर्ड का हक है।