थम गई हिन्दी साहित्य में आलोचना की कलम, लंबी बीमारी के बाद साहित्यकार नामवर सिंह का निधन


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (20 फरवरी): हिंदी साहित्य के मसहूर साहित्यकार नामवार सिंह अब हमारे बीच नहीं रहे।  92 साल के नामवर सिंह ने दिल्ली के एम्स में आखिरी सांस ली। नामवर सिंह पिछले एक महीने से दिल्ली एम्स के ट्रामा सेंटर में भर्ती था। उन्हें ब्रेन हैमरेज की वजह से लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया था।इससे पहले जनवरी में भी तबीयत खराब होने की वजह से उन्हें आईसीयू में भर्ती करवाया गया था, लेकिन कुछ दिन बाद तबियत ठीक होने के बाद उन्हें आईसीयू से हटा लिया गया था। जानकारी के मुताबिक नामवर सिंह अपने कमरे में गिर गए थे, जिसके बाद उन्हें अस्‍पताल में भर्ती करवाया गया। हालांकि उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई और उन्हें बचाया नहीं जा सका।


आजाद भारत में साहित्य की दुनिया में नामवर सिंह का नाम सर्वाधिक चर्चित रहा। कहा जाता है कि उनकी ऐसी कोई किताब नहीं जिस पर वाद-विवाद और संवाद न हुआ हो। देश भर में घूम-घूमकर वे अपने व्याख्यानों, साक्षात्कारों से सांस्कृतिक हलचल उत्पन्न करते रहे। उन्हें साहित्य अकादमी सम्मान से भी नवाजा गया है। डॉ नामवर सिंह के निधन से साहित्य जगत में गहरा शोक है। साहित्य और पत्रकारिता जगत के दिग्गजों ने उनके निधन पर शोक जता रहे हैं।


नामवार सिंह को हिन्दी साहित्य मार्क्सवादी विचारों के लेखक के तौर पर जानता है। उनका जन्म 28 जुलाई सन् 1926 को उत्तर प्रदेश के बनारस जिले में हुआ था। वे महान उपन्यास लेखक हजारी प्रसाद द्ववेदी के प्रिय शिष्य रहे। नामवार सिंह अध्ययनशील और विचारक प्रवृत्ति के लेखक थे। वे मार्क्सवादी चिंतन के बड़े पैरोकार में गिने जाते हैं। मार्क्सवाद को वे अध्ययन की पद्धति के रूप में, चिन्तन की पद्धति के रूप में, समाज में क्रान्तिकारी परिवर्तन लाने वाले मार्गदर्शक सिद्धान्त के रूप में और जीवन और समाज को मानवीय बनाने वाले सौन्दर्य-सिद्धान्त के रूप में स्वीकार करते थे।