केजरीवाल सरकार को अब तक लगे 10 बड़े झटके

डॉ. संदीप कोहली, नई दिल्ली (4 अगस्त): केजरीवाल नहीं हैं दिल्ली के 'बॉस'। जी हां यह दिल्ली हाईकोर्ट का कहना है। केंद्र और दिल्ली सरकार के अधिकारों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने आज एक अहम फैसला सुनाया है। फैसले से केजरीवाल सरकार को बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने कहा है कि एलजी ही दिल्ली के प्रशासक हैं ना कि सीएम। दिल्ली सरकार उनकी मर्जी के बिना कोई कानून नहीं बना सकती। साथ ही कहा कि दिल्ली में कानून व्यवस्था के मामले में केन्द्र ही सर्वोपरि रहेगा। 

क्या कहा हाईकोर्ट ने... - 239 AA दिल्ली को केंद्र शासित प्रदेश का स्पेशल स्टेटस देता है। - एलजी अरविंद केजरीवाल सरकार की सलाह मानने को बाध्य नहीं हैं।  - एलजी अपना स्वतंत्र निर्णय ले सकते हैं, दिल्ली में केंद्र का नोटिफिकेशन मान्य रहेगा। - दिल्ली सरकार को कोई भी नोटिफिकेशन जारी करने से पहले LG की मंजूरी लेनी होगी। - भूमि, लॉ एंड ऑर्डर और पुलिस केंद्र के अंडर। - ACB केंद्रीय कर्मचारियों पर कारवाई नहीं कर सकती।  - दिल्ली सरकार के दोनों मामलों में कमेटी बनाने के फैसले अवैध हैं।

केंद्र सरकार ने क्या दी दलील... - दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश है और ये 239 AA के बाद भी केंद्र शासित प्रदेश है। - दिल्ली क्योंकि देश की राजधानी है लिहाज़ा इसको पूरे तौर पर राज्य सरकार के जिम्मे नहीं दिया जा सकता। - उपराज्यपाल और राज्यपाल में अंतर होता है, उपराज्यपाल केंद्र की सलाह लेकर ही काम करता है। - उपराज्यपाल राष्ट्रपति के प्रतिनिधि के तौर पर काम करते है जो की केंद्र की सलाह के साथ फैसले लेते हैं। - सीएम सिर्फ सलाह दे सकते हैं अंतिम फैसला उपराज्यपाल का ही होता है। - दिल्ली सरकार के मंत्रियों की सलाह मानना उपराज्यपाल के लिए ज़रूरी नहीं।

दिल्ली सरकार ने क्या दी दलील... - दिल्ली में जनता प्रतिनिधि को चुनती है, ऐसे में दिल्ली का असली बॉस सीएम ही हो सकता है। - दिल्ली सरकार का आरोप है कि हम कोई भी फैसला लेते हैं उपराज्यपाल उसे असंवैधानिक करार दे देते हैं। - ACB का कार्यक्षेत्र दिल्ली है लिहाजा वो दिल्ली सरकार के अधीन ही आता है। - LG नजीब जंग दिल्ली सरकार के कैबिनेट फैसले को मानने को बाध्य हैं।

अधिकारों की जंग - संविधान के अनुच्छेद 239AA: भारत की यूनियन टैरिटरी में पुलिस, कानून व्यवस्था और जमीन से जुड़े मामलों में शक्ति केंद्र के पास है।  - संविधान के अनुच्छेद 131: केंद्र और राज्य के बीच किसी भी विवाद को सुप्रीम कोर्ट द्वारा ही सुलझाया जा सकता है।

हाईकोर्ट में 10 याचिकाएं थी दाखिल- दरअसल दोनों के बीच कई मुद्दों पर अधिकारों को लेकर टकराव होता रहा है जिसको लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही थी। हाईकोर्ट ने 24 मई को दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। CNG घोटाले आयोग गठन, DDCA की जांच पर कमेटी गठन, ACB के अधिकार क्षेत्र पर, ACB प्रमुख मुकेश मीणा की नियुक्ति और सर्किल रेट समेत दिल्ली हाईकोर्ट में 10 याचिकाएं दाखिल की गई थीं। 

सुप्रीम कोर्ट लगा चुका है लताड़- इससे पहले दिल्ली सरकार कई फैसले पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई थी, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार लताड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चकी है और अब उसे रोका नहीं जा सकता। अगर हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट न हो तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

ACB को कार्रवाई का अधिकार नहीं- उच्च न्यायालय ने कहा कि एसीबी को केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई से रोकने की केंद्र की 21 मई 2015 की अधिसूचना न तो अवैध है और न ही अस्थायी।

उपराज्यपाल के सभी फैसले संवैधानिक- अदलात के अनुसार सेवा मामले, दिल्ली विधानसभा के अधिकारक्षेत्र से बाहर हैं और उपराज्यपाल जिन शक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे असंवैधानिक नहीं हैं। 

केजरीवाल के गठित आयोग अवैध- उच्च न्यायालय ने सीएनजी फिटनेस घोटाले और डीडीसीए घोटाले में जांच आयोग बनाने के आप सरकार के आदेश को अवैध ठहराया क्योंकि यह आदेश उपराज्यपाल की सहमति के बिना जारी किया गया।

'आप' सरकार फैसले के खिलाफ करेगी अपील- उच्च न्यायालय में आप सरकार के वकील ने कहा कि वह इस फैसले के खिलाफ तत्काल अपील दायर करेंगे। आप सरकार की ओर से भी कहा गया है कि वे संवैधानिक बेंच तक अपील करेंगे।

केजरीवाल सरकार को लगे बड़े झटके

कोर्ट से केजरीवाल सरकार को फटकार लगना कोई नहीं बात नहीं है। हाईकोर्ट हो या सुप्रीम कोर्ट पिछले 18 महीनों में केजरीवाल सरकार को कोर्ट से कई झटके मिले हैं... 

दिल्ली हाईकोर्ट से लगे झटके...

पहला झटका- 30 अक्टूबर 2015- दिल्ली हाइकोर्ट ने दिया केजरीवाल को झटका, तीनों बिजली कंपनियों का CAG आडिट नहीं होगा दिल्ली हाईकोर्ट की स्पेशल बेंच ने दिल्ली की बिजली कंपनियों के CAG आडिट के मामले में अपना फैसला सुनाया है। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने जनवरी 2014 में तीनों बिजली कंपनियों BSES राजधानी, BSES यमुना और TATA पावर के सीएजी आडिट के आदेश दिए थे जिसके खिलाफ कंपनियों ने हाइकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। 

दूसरा झटका- 9 फरवरी 2016- दिल्ली हाईकोर्ट से केजरीवाल को झटका, चलता रहेगा मानहानि का मुकदमा दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को झटका दिया है, हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि केजरीवाल के खिलाफ दायर मानहानि का केस खारिज नहीं किया जाएगा, गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी ने वित्त मंत्री अरुण जेटली के याचिका के खिलाफ हाईकोर्ट में पिटीशन फाइल किया था कि मानहानि केस को खारिज किया जाए।

तीसरा झटका- 10 फरवरी 2016- दिल्ली हाईकोर्ट से केजरीवाल को झटका, सीबीआई नहीं देगी छापे में जब्त दस्तावेज दिल्ली उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस बात का अधिकार दिया कि वह मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के दफ्तर पर मारे गए छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को अपने पास रख सके।  निचली अदालत ने सीबीआई को आदेश दिया था कि वह छापे के दौरान जब्त दस्तावेजों को दिल्ली सरकार को लौटा दे। 

सुप्रीम कोर्ट की फटकार...

पहला झटका- 22 फरवरी 2016- केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार, कहा- हर मुद्दे पर कोर्ट आ जाते हो हरियाणा में जाट आरक्षण के चलते दिल्ली में चल रहे जल संकट पर केजरीवाल सरकार राहत की उम्मीद लेकर सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को लताड़ दिया. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को कहा, 'आप अपने दफ्तर में बैठे रहते हैं, जबकि आपको हरियाणा सरकार से बात करके इस मुद्दे को सुलझाना चाहिए था.' अदालत ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार हर मुद्दे पर अदालत पहुंच जाती है.

दूसरा झटका- 13 मई 2016- सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, बना रहेगा आपराधिक मानहानि का कानून सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मानहानि कानून के खिलाफ दायर याचिका पर बड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने मानहानि के मुद्दे पर दंडात्मक कानूनों की संवैधानिक वैधता की पुष्टि की और कहा कि हमने देशभर में मजिस्ट्रेटों को निर्देश दिए हैं कि वे निजी मानहानि की शिकायतों पर सम्मन जारी करते समय अत्यंत सावधानी बरतें। शीर्ष कोर्ट ने आईपीसी की धारा 499 और 500 को संवैधानिक करार देते हुए याचिका को खारिज कर दिया। 

तीसरा झटका- 8 जुलाई 2016-  सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, हाईकोर्ट की सुनवाई में नहीं करेगी हस्तक्षेप दिल्ली की केजरीवाल सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है. केंद्र के साथ अधिकारों की लड़ाई को लेकर केजरीवाल सरकार सुप्रीम कोर्ट गई थी. जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार लताड़ा था। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार करते हुए कहा था कि हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चकी है और अब उसे रोका नहीं जा सकता। अगर हाईकोर्ट के फैसले से संतुष्ट न हो तो सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

चौथा झटका- 8 जुलाई 2016- सुप्रीम कोर्ट से केजरीवाल को झटका, पूर्ण राज्य के मामले में दिल्ली सरकार की याचिका सुनने से किया इनकार सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिल्ली सरकार को झटका लगा है। दिल्ली सरकार अपनी और केंद्र सरकार की शक्तियों की व्याख्या करने के लिए कोर्ट की शरण में गई थी। दिल्ली सरकार की याचिका में दिल्ली के पूर्ण राज्य के दर्जे वाली स्थिति को स्पष्ट करने की भी मांग थी। कोर्ट ने दिल्ली सरकार की इस याचिका को सुनने से इनकार कर दिया है।

केजरीवाल सरकार को राष्ट्रपति तक दे चुके हैं झटका

13 जून 2016- केजरीवाल सरकार को राष्‍ट्रपति ने दिया तगड़ा झटका, लाभ के पद वाले बिल को मंजूरी देने से किया इंकार- अरविंद केजरीवाल सरकार को राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी से बड़ा झटका लगा है। राष्‍ट्रपति ने लाभ के पद पर लाए गए बिल को मंजूरी देने से मना कर दिया है। दिल्‍ली सरकार ने पिछले साल यह बिल पास किया था ताकि संसदीय सचिव के पद पर तैनात उसके 21 विधायकों की वैधता बरकरार रहे। राष्‍ट्रपति की चिट्ठी दिल्‍ली सरकार को भेज दी गई है।

CBI ने भी दिया केजरीवाल सरकार को झटका

15 दिसंबर 2015- केजरीवाल के दफ्तर पर CBI का छापा- दिल्ली सचिवालय पर सीबीआई का छापा, केजरीवाल सरकार का दावा सीएम अरविंद केजरीवाल का दफ्तर किया गया सील। जबकि सीबीआई का कहना था कि छापे अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार के घर और दफ्तर पर मारे गए। राजेंद्र कुमार के खिलाफ पद का दुरुपयोग करने का एक केस दर्ज किया गया। 

4 जुलाई 2016- केजरीवाल के प्रधान सचिव गिरफ्तार- दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के प्रधान सचिव राजेंद्र कुमार को CBI ने किया गिरफ्तार। सीबीआई ने राजेंद्र कुमार के अलावा चार अन्य लोगों को भी गिरफ़्तार किया है। इन लोगों को 2006 में एक कांट्रेक्ट देने के मामले में गिरफ़्तार किया गया। इन्हें अपनी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।

केजरीवाल सरकार को लगा है अब तक का सबसे बड़ा झटका उसके 12 विधायकों की गिरफ्तारी

- जुलाई 2016- नरेला विधायक शरद चौहान (गिरफ्तार... आप की कार्यकर्ता सोनी की आत्महत्या के मामले में दिल्ली पुलिस ने किया गिरफ्तार। - जुलाई 2016 ओखला विधायक अमानतुल्ला खान (गिरफ्तार)... महिला से बदसलूकी का आरोप। - जुलाई 2016-महरौली विधायक नरेश यादव (गिरफ्तार)... पंजाब पुलिस ने मुताबिक 24 जून को मलेरकोटला पवित्र ग्रंथ अनादर कांड में आरोपी हैं। - जून 2016: देवली विधायक प्रकाश जरवाल (गिरफ्तार)... महिला ने छेड़छाड़, गालीगलौच, मारपीट व जान से मारने की धमकी देने का आरोप - जून 2016: संगम विहार विधायक दिनेश मोहनिया (गिरफ्तार)...  महिला से छेड़छाड़ का आरोप - मई 2016: हरिनगर विधायक जगदीप सिंह (गिरफ्तार)... मारपीट और धमकी देने का आरोप - जनवरी 2016: विकासपुरी विधायक महिंदर यादव (गिरफ्तार)... दंगा फैलाने, शांतिभंग करने का आरोप - नवंबर 2015: मॉडल टाउन विधायक अखिलेश त्रिपाठी (गिरफ्तार)... दंगा फैलाने का आरोप - सितंबर 2015: मालवीय नगर विधायक सोमनाथ भारती (गिरफ्तार)... घरेलु हिंसा, हत्या का कोशिश का आरोप - अगस्त 2015:  दिल्ली कैंट विधायक कमांडो सुरेंद्र सिंह (गिरफ्तार)... दलित कर्मचारी से मारपीट का आरोप - जुलाई 2015: कोंडली विधायक मनोज कुमार (गिरफ्तार)... ज़मीन के फ़र्ज़ीवाड़े का आरोप - जून 2015:  त्रिनगर विधायक जितेंद्र सिंह तोमर (गिरफ्तार)... फ़र्ज़ी डिग्री का आरोप

CM केजरीवाल LG जंग के बीच 'जंग' कोई नई नहीं है... कई मुद्दों LG केजरीवाल सरकार को दे चुके हैं झटके

फरवरी 14, 2015 को अरविंद केजरीवाल की सीएम पद की शपत के बाद से ही, दिल्ली पुलिस, डीडीए और अधिकारियों की नियुक्ति को लेकर केजरीवाल सरकार LG से टकराती नजर आई है। कब-कब आए केजरीवाल-LG जंग आमने-सामने... 

- 18 मार्च 2015- आप विधायकों से मारपीट के मामले की मजिस्ट्रेट जांच को LG नजीब जंग ने किया खारिज।  - 22 अप्रैल  2015- नौकरशाही पर उपराज्यपाल नजीब जंग ने सीएम केजरीवाल को नसीहत दे डाली, कानून के दायरे में रहकर काम करें। - 3 मई 2015-  फाइल भेजने के मामले में LG का फटकार, विधानसभा के सभी कानून LG के पास अंतिम मंजूरी के लिए आना जरूरी है। - 15 मई 2015- दिल्ली के मुख्य सचिव केके शर्मा छुट्टी पर के बाद LG ने शकुंतला डी गामलिन को कार्यकारी मुख्य सचिव बनाया।  - 18 मई 2015- LG नजीब जंग ने सेक्रेटरी (सर्विसेस) के पद पर राजेंद्र कुमार की नियुक्ति को रद्द कर दिया। - 3 जून 2015- भ्रष्टाचार रोधी शाखा (एसीबी) में बिहार के पांच पुलिसकर्मियों की नियुक्ति को LG ने खारिज किया। - 9 जून 2015- LG नजीब जंग ने दिल्ली पुलिस के एक संयुक्त आयुक्त मुकेश मीणा को एसीबी का प्रमुख नियुक्त किया।  - 22 जुलाई 2015- एलजी नजीब जंग ने दिल्ली महिला आयोग में अध्यक्ष के तौर पर स्वाति मालिवाल की नियुक्ति रद्द कर दी, बाद में मंजूरी दी।