नहाय-खाय के साथ आस्था का महापर्व छठ आज से शुरू

नई दिल्ली(4 नवंबर): भगवान सूर्य की आराधना और उपासना का महापर्व छठ आज नहाय-खाय के साथ शुरू हो रहा है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले लोगों के घरों में छठ के गीत गूंजने लगे हैं। इसके साथ ही फिजां में आस्था की खुशबू घुलने लगी है।

- छठ पर्व चार दिनों का होता है जिसमें पहला दिन कार्तिक शुक्ल चतुर्थी ‘नहाय-खाय’ के रूप में मनाया जाता है। इस दिन सबसे पहले घर की साफ-सफाई कर उसे पवित्र बनाया जाता है। इसके बाद छठव्रती स्नान कर पवित्र तरीके से बने शुद्ध शाकाहारी भोजन ग्रहण कर व्रत की शुरुआत करते हैं। घर के सभी सदस्य व्रती के भोजन करने के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं।

- नहाय-खाय के दिन व्रती किसी नदी या जलाशय में स्नान करते हैं। नदी या जलाशय के अभाव में व्रती साफ पानी में गंगा जल मिलाकर भी स्नान कर सकते हैं। इसके बाद पूरी शुद्धि के साथ व्रती बगैर लहसुन, प्याज और मिर्च व मसाले के लौकी की सब्जी, अरवा चावल और चने की दाल तैयार करती हैं। व्रती यही भोजन व्रत के संकल्प के लिए ग्रहण करते हैं। व्रतियों के भोजन कर लेने के बाद यही भोजन घर के अन्य सदस्य प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

- नहाय-खाय के दिन कद्दू की सब्जी और अगस्त के फूल का बचका बनाने का नियम है। ज्योतिष शास्त्री हरिकेष पांडेय ने बताया कि व्रत के दौरान व्रती को लंबा उपवास करना होता है। उस दौरान व्रती के शरीर में पानी की कमी हो जाती है। तब कद्दू शरीर में पानी की कमी की पूर्ति करता है, जिससे श्रद्धालु को ताकत मिलती रहती है। तो वहीं अगस्त का फूल रोग निरोधक होता है। कार्तिक माह में मौसम परिवर्तन के चलते यह व्रती को बीमार होने से बचाता है।