शहीद सुखराज सिंह की मां ने कहा, उनके जैसा बेटा घर-घर में पैदा हो

गुरप्रीत सिंह, गुरदासपुर (30 नवंबर): जम्मू कश्मीर के नगरोटा में हुए आतंकी हमले का हमारे जांबाज़ जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। दहशतगर्दों की साजिश पूरे आर्मी कैंप को तबाह करने की थी, लेकिन नाकाम रहे। इस हमले में दो मेजर सहित कुल 7 जवान शहीद हो गए। हर शहीद ने जांबाज़ी का नया इतिहास लिखा। इसमें गुरदासपुर के जवान सुखराज सिंह भी थे। अब पूरा देश कह रहा है कि शहीदों के बलिदान का बदला लो पाकिस्तान से और हिसाब बराबर करो।

दिल में गहरा दर्द लिए शहीद सुखराज सिंह की मां कहती हैं कि उनके जैसा बेटा घर-घर में पैदा हो। सुखराज सिंह आर्मी में हवलदार थे। वे पंजाब के गुरदासपुर के बटाला के रहने वाले थे। नगरोटा में आतंकियों से लोहा लेते हुए सुखराज मंगलवार को शहीद हो गए। सुखराज की पत्नी हरमीत कहती हैं कि उनका सुहाग भले उजड़ गया हो, लेकिन उनके पति ने देश की शान पर आंच आने नहीं दी। अपनी शहादत से उन्होंने मेरा भी मान बढ़ाया है। सुखराज की उम्र अभी सिर्फ 32 साल की थी। घर में मां और पत्नी के अलावा 7 साल की बेटी और 4 साल का बेटा है।

एक दिन बाद सुखराज छुट्टी पर आनेवाले थे। घर में फोन कर कहा था कि दोपहर 12 बजे जम्मू से चलूंगा तो शाम तक घर आ जाऊंगा, लेकिन इससे पहले ही यूनिट कोर पर हमला हो गया। बच्चे काफी खुश थे, सबको इंतजार था कि पापा आएंगे तो उनके लिए कई तोहफे लाएंगे। नए-नए कपड़े लाएंगे, मिठाइयां लाएंगे, लेकिन अब ये इंतज़ार कभी खत्म नहीं होगा और उनके पापा कभी नहीं आएंगे।

दादी और मां के लिए दोनों बच्चों को समझाना मुश्किल है। भला वे इन्हें कैसे समझाएं कि पापा देश की खातिर शहीद हो गए हैं। अब वो कभी वापस नहीं लौटेंगे। इनकी आंखें छलक आती हैं, लेकिन फिर खुद को संभालती हैं। शहीद सुखराज सिंह की बचपन से तमन्ना थी कि वे बड़े होकर आर्मी में जाएं। मां से गुरुओं के बलिदान और वीरता की कहानी सुनकर वे बड़े हुए थे। मां ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया। इसके दम पर उन्होंने पहले आर्मी में जाने का सपना पूरा किया और फिर देश के लिए खुद को बलिदान कर दिया।

वीडियो:

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