कुंभ विशेष: जानें अपने साथ हथियार क्यों रखते हैं नागा साधु ?

न्यूज 24 ब्यूरो, वरुण सिन्हा, प्रयाग राज (14 जनवरी): संन्यासी जीवन सादगी और संयम की मिसाल माना जाता है, लेकिन नागा साधुओं की कई चीजें लोगों को हैरान भी करती है और उन पर सवाल भी खड़े होते हैं। मसलन नागा साधु चिलम क्यों पीते हैं, वो अपने साथ हथियार क्यों रखते हैं और आम लोगों के साथ उनका बर्ताव रुखा और सख्त क्यों होता है। न्यूज 24 ने इन तमाम सवालों का जवाब जानने की कोशिश की।

सिर पर जटा और बदन पर भभूत हर नागा साधु की पहली पहचान है। पर कहते हैं कि जब तक हाथों में चिलम न हो तब नागा साधु होने की पहचान अधूरी है। प्रयाग कुंभ में भी आपको कई चिलमधारी नागा साधु देखने को मिल जाएंगे। सवाल है कि खुद को शिव का दूत और ईश्वर का सच्चा उपासक बताने वाले नागा साधु चिलम क्यों पीते हैं। संसारिक मोह-माया और हर व्यसन से दूर रहने वाले इन नागा साधुओं का चिलम से क्या रिश्ता है।

हालांकि कई ऐसे नागा साधु भी हैं जो चिलम को हाथ लगाना भी पसंद नहीं करते। जैसे निरंजनी अखाड़े से जुड़े नागा साधुओं के लिए चिलम समेत हर व्यसन की सख्त मनाही है। पर सभी नागा साधु ऐसा नहीं मानते। उनके लिए ईश्वर की साधना में लीन रहने के लिए चिलम का साथ जरूरी है। चिलम की तरह ही नागा साधुओं की एक और बड़ी पहचान है उनका शस्त्रधारी होना। किसी के हाथ में त्रिशूल, किसी के हाथ में तलवार, कोई गदाधारी। कहते हैं नागा साधुओं के लिए शस्त्र की पूजा करना और उसे धारण करना भी उनके संन्यास जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है, इसकी कई वजहें हैं।

दरअसल नागा साधुओं का मानना है कि समाज और धर्म की रक्षा के लिए शस्त्र धारण करना जरूरी है। इससे उनकी खुद की रक्षा भी होती है और आने वाले संकट भी दूर से ही टल जाते हैं। नागा साधुओं के गुस्से को लेकर भी तरह तरह की बातें होती हैं। ज्यादातर लोग तो नागा साधुओं के क्रोध के डर से ही उनके पास जाने से घबराते हैं, लेकिन नागा साधुओं का कहना है कि उनका गुस्सा भी उनके स्वभाव की तरह ही निर्मल और क्षणिक होता है।

नागा साधु मानते हैं कि वो खुद तो सांसारिक मोह माया छोड़ चुके होते हैं पर आम लोगों को नींद से जगाने के लिए उनके साथ कई बार कठोर बर्ताव करना जरूरी हो जाता है। नागा साधुओं की जटाओं को लेकर भी आम लोगों में काफी कौतूहल होता है। नागा साधु का मतलब है आजीवन निर्वस्त्र रहना, लेकिन आम लोगों में इनके यौन जीवन को लेकर भी कई तरह की भ्रांतियां हैं।