यहां देवता भी पी जाते शराब, ये है रहस्य !

नई दिल्ली (11 जनवरी): पुराणों में कई कथाएं आती हैं ज‌िनमें देवताओं के सोमरस पान का ज‌िक्र आता है। सामान्य भाषा में लोग सोमरस को शराब मान लेते हैं लेक‌िन ऋग्वेद और कई पुराणों में सोमरस का मतलब एक खास प्रकार का पेय बताया गया है जो सोम नामक पौधे की पत्त‌ियों से तैयार क‌िया जाता था। सोमरस को शक्त‌ि वर्धक पेय के रूप में बताया गया है। वृत्रासुर के वध के समय इंद्र ने सोमरस का पान क‌िया ज‌िससे उन्हें बल की प्राप्त‌ि हुई और उन्होंने वृत्रासुर का अंत कर द‌िया। सोमरस अगर शराब होता तो शास्‍त्रों में शराब और मद‌िरा के सेवन की मनाही नहीं होती। लेक‌िन ऐसा नही है क‌ि देवी देवता शराब नहीं पीते हैं। आज भी कई देवी-देवताओं के मंद‌िर हैं जहां शराब भेंट क‌िया जाता है और इसे प्रसाद रूप में बांटा जाता है लेक‌िन इसके पीछे एक खास कारण और उद्देश्य है।

ये है धर्म नगरी हर‌िद्वार में स्‍थ‌ित मां दक्ष‌िण काली। इस मंद‌िर में मां काली को हर शन‌िवार कई श्रद्धालु शराब चढ़ाने आते हैं। इसके पीछे मान्यता यह है क‌ि देवी को शराब चढ़ाने से शराब की लत छूट जाती है यानी नशे से मुक्त‌ि के ल‌िए यहां शराब चढ़ाने की मान्यता है।

राजस्‍थान के नागौर ज‌िले में स्‍थ‌ित  मां भुवाल काली माता के बारे में मान्यता है क‌ि यहां माता भक्तों के ढ़ाई प्याला शराब ग्रहण करती हैं। अंत‌िम प्याले में बचे हुए शराब को भैरो पर चढ़ाया जाता है। इसके पीछे मान्यता है क‌ि डाकूओं ने इस मंद‌िर का न‌िर्माण क‌िया था क्योंक‌ि माता ने उनके प्राण बचाए थे। डाकूओं ने माता का उपकार मानते हुए उनकी पूजा का व‌िचार क‌िया लेक‌िन उस समय उनके पास प्रसाद चढ़ाने के ल‌िए कुछ भी नहीं था स‌िवाय शराब के। डाकूओं ने माता को शराब भेंट क‌िया तो एक के बाद एक ढ़ाई प्याले खत्म हो गए। इसके बाद से ही यहां मनोकामना पूरी करने के ल‌िए शराब चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई।

मध्‍यप्रदेश के इंदौर में स्‍थ‌ित‌ि महामाया देवी ज‌िन्हें महालाया चौबीस खंभा माता के नाम से भी जाना जाता है क्योंक‌ि मंद‌िर में काले पत्‍थर के 24 खंभे हैं। इस मंद‌िर में नवरात्र की अष्टमी त‌िथ‌ि को देवी की पूजा शराब से की जाती है। कहते हैं यह परंपरा महाराजा व‌िक्रमाद‌ित्य के समय से चली आ रही है। व‌िक्रमाद‌ित्य नगर की रक्षा के ल‌िए नगर की देवी की पूजा करते थे। इस पूजा में शराब का भी प्रयोग क‌िया जाता था। आज भी इसी परंपरा को न‌िभाया जाता है।

महाकाल की नगरी उज्‍जैन शहर से करीब 8 क‌िलोमीटर की दूरी पर स्‍थ‌ित है यह काल भैरव का मंद‌िर ज‌िन्हें महाकाल का सेनापत‌ि कहा जाता है। कहते हैं कालभैरव वाम मार्गी देवता हैं ज‌िनकी साधना तांत्र‌िक मांत्र‌िक करते हैं। मान्यता है क‌ि यहां क‌िसी समय तंत्र साधना के ल‌िए केवल तांत्र‌िक आया करते थे उन्हीं की साधनों से यहां कालभैरव को शराब चढ़ाने की परंपरा शुरु हुई। भैरव बाबा की खूबी यह है क‌ि इनके मुख से शराब की बोतल लगाते ही बोतल खाली होने लगती है। शराब कहां चला जाता है इस बात का पता आज तक कोई नहीं कर सका है।

राजस्‍थान में स्‍थ‌ित आमेर के क‌िले में मां काली का एक मंद‌िर है। कहते हैं यह यह राजा मानस‌िंह की इष्ट देवी हैं जो श‌िला देवी के नाम से जानी जाती हैं। ऐसी कथा है क‌ि नगर की रक्षा के ल‌िए मानस‌िंह देवी की पूजा क‌िया करते थे और प्रसाद के तौर पर शराब चढ़ाया करते थे। अब राज घराना तो नहीं रहा लेक‌िन राजा मानस‌िंह के द्वारा शुरू की गई परंपर आज भी यहां कायम है और देश व‌‌िदेश से श्रद्धालु माता को शराब का प्रसाद चढ़ाने आते हैं, कहते हैं इससे भक्तों की मुरादें पूरी होती हैं।