'जलती चिता पर सेकते हैं रोटी, मुर्दे की खोपड़ी में पीते हैं पानी'

नई दिल्ली (12 फरवरी): अघोर पंथ सनातन धर्म का एक संप्रदाय है। अघोरियों का जीवन जितना कठिन है, उतना ही रहस्यमयी भी। अघोरियों की दुनिया ही नहीं, उनकी हर बात निराली होती है। अघोरियों की रहस्यमयी जिंदगी की कुछ खास बातें:  

अघोरी मूलत: तीन तरह की साधनाएं करते हैं। शिव साधना, शव साधना और श्मशान साधना। शिव साधन और शव साधना में प्रसाद के रूप में मांस और मदिरा चढ़ाई जाती है। तीसरी साधना होती है श्मशान साधना, जिसमें आम परिवारजनों को भी शामिल किया जा सकता है। श्मशान में पूजा की जाती है। यहां गंगा जल और प्रसाद के रूप में मांस-मदिरा की जगह दूध से बना मावा चढ़ाया जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि अघोरी साधना बल से मुर्दों से भी बात कर सकते हैं। अघोरी गाय का मांस छोड़ कर मानव मल से लेकर मुर्दे का मांस तक खा लेते हैं। अघोरपंथ में श्मशान साधना का विशेष महत्व है। इसलिए वे श्मशान में रहना ही ज्यादा पंसद करते हैं। श्मशान में साधना करना शीघ्र ही फलदायक होता है। श्मशान में साधारण मानव जाता ही नहीं। इसीलिए साधना में विध्न पडऩे का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। उनके मन से अच्छे बुरे का भाव निकल जाता है। 

कहा जाता है कि आज भी ऐसे अघोरी और तंत्र साधक हैं जो पराशक्तियों को अपने वश में कर सकते हैं। ये साधनाएं श्मशान में होती हैं और दुनिया में सिर्फ चार श्मशान घाट ही ऐसे हैं जहां तंत्र क्रियाओं का परिणाम बहुत जल्दी मिलता है। ये हैं तारापीठ का श्मशान (पश्चिम बंगाल), कामाख्या पीठ (असम) का श्मशान, त्र्र्यम्बकेश्वर (नासिक) और उज्जैन (मध्य प्रदेश) का श्मशान।