इन 5 बातों के लिए मशहूर है मैसूर का दशहरा...

नई दिल्ली(11 अक्टूबर): कर्नाटक का मैसूर शहर दशहरा के लिए भी पूरे देश में प्रसिद्ध है।  यह त्योहार बड़ी संख्या में यात्रियों को आकर्षित करता है।  यहां तरह-तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। 

आइए जानें, देश के सबसे बड़े त्योहार को देश के सबसे सुंदर शहर में अलग तरह से सेलिब्रेट करने की कहानी...

1. मैसूर में दशहरे के समय खूब रौनक लगती है।  यहां 10 दिनों तक बहुत से सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। साथ ही फूड मेला, वुमेन दशहरा जैसे कार्यक्रम भी होते हैं। 

2. विजयदशमी के दिन मैसूर की सड़कों पर जुलूस निकलता है। इस जुलूस की खासियत यह होती है कि इसमें सजे-धजे हाथी के ऊपर एक हौदे में चामुंडेश्वरी माता की मूर्ति रखी जाती है। सबसे पहले इस मूर्ति की पूजा मैसूर के रॉयल कपल करते हैं उसके बाद इसका जुलूस निकाला जाता है। यह मूर्ति सोने की बनी होती है साथ ही हौदा भी सोने का ही होता है। 

3. इस जुलूस के साथ म्यूजिक बैंड, डांस ग्रुप, आर्मड फोर्सेज, हाथी, घोड़े और ऊंट चलते हैं। यह जुलूस मैसूर महल से शुरू होकर बनीमन्टप पर खत्म होती है। वहां लोग बनी के पेड़ की पूजा करते हैं। माना जाता है कि पांडव अपने एक साल के गुप्तवास के दौरान अपने हथियार इस पेड़ के पीछे छुपाते थे और कोई भी युद्ध करने से पहले इस पेड़ की पूजा करते थे। 

4. इस मौके पर मैसूर महल के सामने एक प्रदर्शनी भी लगती है। दशहरा से शुरू होकर यह दिसंबर तक चलती है। इस एग्जीबिशन में कपड़े, कॉस्मेटिक्स, किचन का सामान, प्लास्टिक का सामान और खाने-पीने की चीजें मिलती हैं।यहां एक गेम एरिया भी होता है, जिसमें तरह-तरह के खेल खेले जा सकते हैं। लोगों में इस एग्जीबिशन के लिए खास उत्साह होता है। 

5. इस बार मैसूर में 'ग्रीन दशहरा' मनाने का निर्णय लिया गया है साथ ही इस साल का थीम 'वॉटर कन्जरवेशन' है। 'वॉटर कन्जरवेशन' थीम रखने का फैसला कावेरी जलग्रह के पास रहने वाले लोगों को ध्यान में रखकर किया गया है। दरअसल इस साल वहां बहुत कम बारिश हुई है और लोग पानी की संकट से जूझ रहे हैं।  इस बार इस फेस्टिवल के चीफ गेस्ट के तौर पर सचिन तेंदुलकर को बुलाने की बात चल रही थ। लेकिन अंतिम समय में इस फैसले को बदल दिया गया। हर साल चीफ गेस्ट के साथ मुख्यमंत्री माता चामुंडेश्वरील की पूजा करते हैं।