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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड: सुनवाई टली, अब 20 जनवरी को आएगा फैसला

मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड (muzaffarpur shelter home rape) मामले में दिल्ली कीन साकेत कोर्ट आज फैसला सुनाया जाएगा। कुछ दिन पहले इस मामले की सुनवाई थी जिसमें कोर्ट ने 14 जनवरी तक के लिए टाल दिया था यह मामला बिहार के शेल्टर होम में नाबालिग बच्चियों और युवतियों से दुष्कर्म से जुड़ा हुआ है।

Photo: Google

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (14 जनवरी): मुजफ्फरपुर शेल्टर होम कांड (muzaffarpur shelter home rape) मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट में आज एक बार फिर से सुनवाई टल गई। बता दें कि शेल्टर होम कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर समेत कुल 21 आरोपियों के खिलाफ आज फैसला आने की उम्मीद है, लेकिन आज होने वाली सुनवाई टल गई है और अब कोर्ट ने 20 जनवरी को 2.30 बजे फैसला सुनाने का वक्त मुकर्रर किया गया है।

बृजेश ठाकुर की तरफ से कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया है कि सीबीआई ने हलफनामे में कहा कि जिन लड़कियों ने यह बयान दिया कि 31  लड़कियों की हत्या की गई वह बात बाद में झूठी निकली। कोर्ट में बृजेश ठाकुर की तरफ से दाखिल याचिका में कहा गया कि पीड़ित लड़कियों के द्वारा दर्ज किए गए बयान पर विश्वास ना किया जाए और उनके बयान को आधार ना माना जाए साकेत कोर्ट ने बृजेश ठाकुर की अर्जी पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

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शेल्टर होम में दुष्कर्म का यह सनसनीखेज मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की रिपोर्ट सामने आने के बाद सुर्खियों में आया। इस मामले में मुख्य आरोपी के तौर पर ब्रजेश ठाकुर का नाम सामने आया जिसे बिहार सरकार का बेहद करीबी बताया जाता है। साकेत कोर्ट ने ब्रजेश ठाकुर समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ पोक्सो, बलात्कार, आपराधिक साजिश जैसी धाराओं में आरोप तय किया है। सीबीआई ने भी मामले में मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर को ही बनाया है। सीबीआई ने कोर्ट में दाखिल की गई अपनी चार्जशीट में बताया है कि जिस शेल्टर होम में बच्चियों के साथ दुष्कर्म होता रहा, उसे ब्रजेश ठाकुर ही चला रहा था।

साकेत कोर्ट ने आरोपी लोगों पर आपराधिक साजिश के साथ दुष्कर्म और अलग-अलग अरोप लगाए हैं। बिहार पीपल्स पार्टी के पूर्व विधायक ब्रजेश ठाकुर पर पॉक्सो एक्ट के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं। आरोपियों में उसके शेल्टर होम के कर्मचारी और बिहार डिपार्टमेंट ऑफ सोशल वेलफेयर के अधिकारी शामिल हैं। यह मामला टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज की एक रिपोर्ट के बाद सामने आया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 7 फरवरी 2019 को मामला बिहार से दिल्ली ट्रांसफर किया गया था और 23 फरवरी 2019 से ही इस मामले की लगातार साकेत कोर्ट में नियमित सुनवाई चल रही थी।


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