मुस्लिम महिला ने पति के ट्रिपल तलाक के नोटिस को मानने से किया इनकार

पुणे(22 अक्टूबर): 18 साल की एक मुस्लिम महिला का इस्‍लामी परंपरा के अनुसार हाल ही में तलाक हो गया था लेकिन उसने तलाक को स्‍वीकार करने से इनकार कर दि‍या और इस 'घृणित प्रथा' के खिलाफ उतरने का फैसला किया।

- अर्शिया बागवान ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद ही उसके ससुरालवालों ने यातना देना शुरू कर दिया था। उस पुणे के पास बारामती में अपने पिता के घर भेज दिया गया जहां उसे अपने पति से कुछ दिनों पहले तलाक का नोटिस मिला जिसमें तीन बार 'तलाक' लिखा हुआ है। - अर्शिया ने कहा कि उसकी शादी 16 साल की उम्र में शहर के एक सब्‍जी व्‍यापारी मोहम्‍मद काजिम बागवान से हुई थी। वे बताती हैं 'शादी के छह महीने बाद ही मेरी सास ने मुझे यातना देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं मेरे गर्भवती होने के बाद भी उत्‍पीड़न जारी रखा।'अब आठ महीने के बच्‍चे की मां अर्शिया ने का कि लगातार झगड़ों के कारण उसे हाल में ससुरालवालों ने माता-पिता के घर भेज दिया था। वे कहती हैं 'मैंने मेरे पति से आपसी समझ के साथ मामले को हल करने की कोशिश की थी। लेकिन उन्‍होंने भी मुझे नजरअंदाज किया और मेरे कॉल तक उठाना बंद कर दिए। कुछ दिनों बाद, मुझे जिंदगी का सबसे बड़ा झटका लगा जब मेरे पति ने एक नोटिस भेजा जिसमें उन्‍होंने तलाक दे दिया।'

- चूंकि यह महिला तलाक के इस 'एकतरफा' तरीका को स्‍वीकार करने को तैयार नहीं थी तो उसने शहर के एक सुधारवादी संगठान मुस्लिम सत्‍य शोधक मंडल से संपर्क किया।

- वे कहती हैं 'हालांकि मुझे अपने पति से नोटिस मिल चुका है, लेकिन मैं इसे स्‍वीकारने को तैयार नहीं हूं और मैं अलग होने के इस मनमाने ढंग के खिलाफ फैमिली कोर्ट में जाऊंगी।'

- दसवीं तक शिक्षा लेने वाली अर्शिया ने कहा कि वह हमेशा से आगे पढ़ाई करना चाहती थी लेकिन शादी के बाद ऐसा नहीं कर पाई। वे कहती हैं 'मैं अब अपनी शिक्षा पूरी करूंगी और मुस्लिम सत्‍य शोधक मंडल के साथ काम करूंगी। मैं मुस्लिम समुदाय की अन्‍य महिलाओं की मदद करूंगी जिसे इस तरह की प्रथाओं से जूझना पड़ता है।'

- मंडल के अध्‍यक्ष शम्‍सुद्दीन तंबोली ने कहा कि वे अर्शिया और उनके जैसी महिलाओं का समर्थन करेंगे।