यह मुसलमान है योगी आदित्यनाथ के मंदिर का सुपरवाइजर, साथ खाता है खाना

नई दिल्ली (20 मार्च): महंत से सीएम बने योगी आदित्यनाथ का फेस भले ही एंटी मुस्लिम के रूप में फेमस हो, लेकिन सच्चाई इससे अलग है। आपको जानकार ताज्जुब होगा कि पिछले 35 सालों में मंदिर यदि कोई नींव रखी गई तो वो मोहम्मद यासीन अंसारी की देखरेख में ही रखी गई। यहां तक कि निर्माण कार्य में खर्च होने वाले लाखों-करोड़ों रुपयों को भुगतान उन्हीं की अनुमति पर होता है।


- यासीन कहते हैं कि छोटे महराज यानि महंत आदित्यनाथ कहीं से भी मंदिर में आते हैं तो सबसे पहले उनसे मिलते हैं और निर्माण कार्य की जानकारी लेते हैं।

- वे किचेन से लेकर बेडरूम तक आते-जाते हैं और साथ बैठकर खाना भी खाते हैं, लेकिन उन्हें योगी के अंदर कभी भी एंटी मुस्लिम छवि नहीं दिखी।

- हां, योगी आदित्यनाथ उनसे नफरत करते हैं, जो खाते हिन्दुतान का हैं और गाते कहीं और की हैं। वो व्यक्ति हिंदू हो या मुसलमान।

- योगी को झूठ बोलने से बेहद नफरत है, वे ईमानदार हैं और दूसरों से उसी की अपेक्षा करते हैं।

- वो गरीबों की मदद खुलकर करते हैं।

- मोहम्मद यासीन अंसारी ने बताया कि उनके बड़े अब्बा वली मोहम्मद सबसे बड़े महंत ब्रह्मलीन दिग्विजयनाथ के समय में पीपीगंज,  आए थे।

- भंडार उन्हीं के जिम्मे था। सास हमीदा बेगम राशन भंडार कक्ष में रहती थी और गेहूं-चावल आदि साफ-सफाई की जिम्मेदारी देखती थीं।

- मोहम्मद यासीन अंसारी योगी आदित्यनाथ के गुरू ब्रह्मलीन महंत अवैद्यनाथ के समय में मई 1777 में मंदिर से जुड़े।

- 1977-83 से यासीन मंदिर में बतौर कैशियर रहे।

- 1983 से लेकर आज तक वे मंदिर के सुपरवाइजर के पद पर हैं।

- मंदिर परिसर में मंदिर का निर्माण हो या भवन का सौंदर्यीकारण, या फिर कोई अन्य भवन यदि उसकी एक ईंट भी रखी जाती है तो वह इनकी निगरानी में रखी जाती है।