मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा - जुबानी तलाक अवैध

जेके श्रीवत्सन, जयपुर (19 अगस्त): ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड ने जुबानी तलाक को अवैध करार दिया है। बोर्ड ने जयपुर में एक मुस्लिम महिला डॉक्टर को दिए जुबानी तलाक को अवैध मानते हुए इस महिला से तलाक के बाद की धार्मिक प्रक्रिया (इद्दत) नहीं करने के निर्देश दिए हैं।

- दरअसल ये मामला एक्युपंकचरिस्ट रुखसाना (बदला हुआ नाम)का है। साल 2002 में टोंक में रुखसाना का निकाह उस्मान खान से हुआ था। जिसके बाद इनके दो बच्चे भी हुए। 

- पति से अनबन शादी के दुसरे साल से ही शुरू हो गयी और जिसके बाद से ही अगल रहकर वह अपने बच्चों को अकेले ही शिक्षा दिला रही है।

- पति की ज्यादतियों से परेशान होकर उसने उस पर दहेज प्रताडऩा और धोखाधड़ी का मुकदमा भी दर्ज कराया।

- जिसके बाद पति का अचानक पत्र मिला जिसमे उसने तीन बार तलाक तलाक और तलाक लिखकर उससे पीछा छुड़ाने की बात कही।

- पति ने इसी के साथ ही किसी और के साथ निकाह करने की भी उसे सूचना दे दी।

- इस तीन तलाक को रुखसाना ने पहले अदालत और फ़िर ऑल इंडिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड में शिकायत दर्ज करायी।

- जिसमे उसने पति द्वारा दिए गए इस तलाक़ को इस्लामी आयतो के मुताबिक इसके जायज होने या नाजायज होने संबंधी फैसला देने की दरख्वास्त की थी।

- रुखसाना के सरे दस्तावेज और हालत को नज़र में रखते हुवे बोर्ड की अध्यक्ष की ओर से उन्हें एक पत्र भेजा गया।

- जिसमे बोर्ड ने उसे दिए गए जुबानी तलाक को अवैध मानते हुए रुखसाना से तलाक के बाद की धार्मिक प्रक्रिया यानी की इद्दत नहीं करने के निर्देश दिए हैं।