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रोजा तोड़कर तोड़ दी धर्म की दीवारें, दिया युवक को खून

बिहार से एक हिंदु-मुस्लिम के भाई चारे और प्यार की मिसाल देने वाला वाक्या सामने आया है। जी हां आपको बता दें कि बिहार के गोपालगंज में रहने वाले जावेद आलम ने आठ साल की बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए अपना रमजान का रोजा तोड़ दिया।

पटना (24 मई): बिहार से एक हिंदु-मुस्लिम के भाई चारे और प्यार की मिसाल देने वाला वाक्या सामने आया है। जी हां आपको बता दें कि बिहार के गोपालगंज में रहने वाले जावेद आलम ने आठ साल की बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए अपना रमजान का रोजा तोड़ दिया। थैलेसीमिया से पीड़ित आठ साल के पुनीत कुमार को खून देने पहुंचे थे। रोजा रखने के कारण उनका खून नहीं लिया जाता, इसलिए उन्होंने अपना रोजा तोड़ दिया।  दरअसल, पुनीत को गोपालगंज सदर के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उसका हीमोग्लोबिन बहुत कम हो गया था। उसे तत्काल खून चढ़ाए जाने की आवश्यकता थी लेकिन हॉस्पिटल के ब्लड बैंक में ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप का खून नहीं था। उनके परिवार में भी किसी का ए पॉजिटिव ब्लड ग्रुप नहीं था। उन्होंने दूसरे ब्लड बैंक में संपर्क किया लेकिन वहां से भी ब्लड की व्यवस्था नहीं हो पाई।जिसके बाद भूपेंद्र ने एक और नंबर पर संपर्क किया तो अनवर हुसैन से उनका संपर्क हुआ। उन्होंने थोड़ा समय मांगा और फिर थोड़ी देर में उनके पास एक दूसरे डोनर जावेद आलम का फोन आया। जावेद ने बताया कि उनका ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव है। अस्पताल में पूछताछ में जब जावेद ने बताया कि उनका रोजा है तो अस्पताल प्रशासन ने उनका ब्लड लेने से मना कर दिया। जावेद को बहुत बुरा लगा। उन्होंने कहा कि उनके लिए बच्चे की जान बचाना ज्यादा जरूरी है। जावेद ने अपना रोजा तोड़ दिया और बच्चे को ब्लड डोनेट किया। वाकई ये वाक्या अपने आप में हिंदु मुस्लिम की एकता और उसके प्यार को दर्शाता है।  

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