भाभा और साराभाई की मौत मिस्ट्री का सच...

नई दिल्‍ली 24 जनवरी: आज से 41 बरस पहले हिंदुस्तान की रेतीली ज़मीन पर हुए एक धमाके ने मगरूर में चूर देश के कुछ चुनिंदा मुल्कों के होश फाख्ता कर दिए थे। ये धमाका देश पर हमला नहीं था बल्कि ये धमाका देश के लिए फख्र का सबब था। ये धमाका था परमाणु परीक्षण का, जिसने पूरी दुनिया को बता दिया कि हिंदुस्तान किसी भी मुल्क से किसी मामले में पीछे नहीं।

देश को परमाणु शक्ति बनाने का ताज जिन दो वैज्ञानिकों के सिर पर सजा था। एक-एक करके उनकी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई। होमी जहांगीर भाभा की मौत को 50 साल हो चुके हैं। 50 साल बाद न्यूज़ 24 एक ऐसे राज़ से पर्दा उठा रहा है जो बेहद ही रहस्यमयी है। 

भाभा की मौत के बाद जब सारे दरवाज़े बंद हो गए तो उम्मीद टिकी विक्रम साराभाई पर, जो हिंदुस्तान को दुनिया के सामने सिर उठाकर खड़ा होने की ताकत दे सके। लेकिन एक रोज़ साराभाई के साथ भी वही हुआ जो होमी भाभा के साथ हुआ था।

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