भारत का पहला मानवरहित टैंक तैयार, टेंशन में चीन और पाकिस्तान


नई दिल्ली (29 जुलाई): सुरक्षा क्षेत्र में भारत ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने एक मानवरहित टैंक तैयार किया है। जिसके बाद इसे तीन मुख्य कामों के लिए अंजाम में लाया जाना है।

इस टैंक के तीन तरह के मॉडल्स विकसित किए गए हैं, जिसमें सर्विलांस, बारूदी सुरंग खोजने वाला और जिन इलाकों में न्यूक्लियर और जैविक हमलों का अंदेशा है, वहां गश्ती लगाने के लिए किया जाएगा। इस टैंक का नाम मुंत्रा रखा गया है। इस टैंक को कॉम्बैट वीइकल्स रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (CVRDE) इसे बनाया है और सेना के लिए इसका परीक्षण किया है, लेकिन पैरामिलिटरी फोर्स ने इस टैंक को नक्सल प्रभावित इलाकों में इस्तेमाल करने की रुचि जाहिर की है।

बख्तरबंद टैंक की तरह डिजाइन किए गए रिमोट से ऑपरेट होने वाले ये टैंक अवाडी में साइंस फॉर सोल्जर्स नाम की प्रदर्शनी में डिस्प्ले में रखे गए हैं। यह प्रदर्शनी डीआरडीओ ने पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित की है।

मुंत्रा-एस देश का पहला मानवरहित ग्राउंड वीइकल है जिसे मानवरहित सर्विलांस के लिए बनाया गया है। वहीं, मुंत्रा-एम सुरंगों का पता लगाने और मुंत्रा-एन उन इलाकों के लिए बनाया गया है जहां न्यूक्लियर रेडिएशन या जैविक हथियारों का खतरा हो। इस वीइकल को राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में 52 डिग्री सेल्सियस तापमान में टेस्ट किया जा चुका है। टैंक में सर्विलांस रडार, लेज़र रेंज फाइंडर के साथ कैमरा है। इसकी मदद से 15 किलोमीटर दूर से ही जासूसी की जा सकती है।