'खूनी ट्रेन' की खौफनाक दास्तां, पांच साल में ले चुकी 30,000 लोगों की जान

मुंबई (28 जून): मायानगरी मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली मुंबई लोकल अब खुनी लोकल बनती जा रही है। ये हम नहीं कह रहे हैं बल्कि दिल दहला देने वाले आंकड़े कह रहे हैं। पिछले एक हफ्ते में मुंबई लोकल से 80 लोगों की मौत हो चुकी है। यानि प्रति दिन 12 लोगों की मौत। अगर पिछले छह महीनों के आंकड़े पर नज़र डालें तो चौंकाने वाली रिपोर्ट आई है। 1 हजार चार सौ लोगों की जान लोकल ट्रेन से जा चुकी है। इसीलिए अब लोग मुंबई की लाइफ लाइन को डेथ लाइन कहने लगे हैं।

मुंबई की लाइफ लाइन बनी डेथ लाइन > इसमें रोजाना 40 लाख से ज्यादा लोग सफ़र करते है। > पिछले 1 हफ्ते में रेल हादसों में करीब 76 लोग अपनी जान गवां चुके है। > जबकि पिछले 6 महीनों के दौरान के आंकड़ा 1473 तक पहुंच गया है। > हैरानी की बात ये कि पिछले सिर्फ 3 दिनों में 39 लोगों की जान जा चुकी है। > रविवार को 10 शनिवार को 15 और गुरुवार को 14 लोगों की मौत हुई है।

आकंड़ों पर गौर करें तो पता चलेगा कि आखिर लाइफ लाइन डेथ लाइन क्यों बन जाती है। कोई साल ऐसा हीं गुज़र रहा है जब लोकल से होने वाली मौतों का आंकड़ा ना बढ़ता हो। > 2015 में लोकल ट्रेनों में 3000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई।  > पिछले 21 महीनों में 5687 लोगों की मौत हुई। > पिछले 5 साल में 30,000 लोगों की मौत हुई है। > मुंबई लोकल से हादसों में अकेले 1 दिन में 14 लोगों की मौत हो चुकी है। > मौतों का आंकड़ा इसी साल यानि 2016 में अब तक 1400 का फीगर क्रॉस कर चुका है।

क्यों होते हैं हादसे वैसे तो मुंबई की लोकल में हर रोज़ मौत होती है, लेकिन बरसात में मौत का आकंड़ा डेढ़ गुना बढ़ जाता है। रेलवे की सुरक्षा से जुड़े लोगों की मानें तो ज़्यादातर मौतें दरवाज़े पर लटक कर सफर करने और पटरियां क्रॉस करने से होती हैं। और तो और चलती ट्रेन पर स्टंट भी मौत की बड़ी वजह होती है।  > कान में एअर फ़ोन लगाकर पटरी क्रॉस करने के कारण। > ट्रेन के ऊपर बैठकर सफ़र करने के कारण। > बरसात के समय में हाथ में पकड़ने वाले हैंडिल का गीला होना और फिसलना बजह बनता है। > कई स्टेशनों पर नीचे प्लेटफॉर्म का बनना भी कारण। > ज्यादातर लोग समय पर मेडिकल सुविधाएं न मिल पाने के चलते भी अपनी जान गंवा देते है।   अदालत भी रेल मंत्रालय को फटकार लगा चुकी है लेकिन अदालत के आदेश के बाद भी अब तक कोई ठोस प्लान नहीं तैयार किया गया। अब जरूरत है रेलवे को सुधार करने की ताकि इन मौतों को रोका जा सके।