...जब योग के दिन पर पटरी से उतर गई मुंबई की रफ्तार वाली जिंदगी

इंद्रजीत सिंह, मुंबई, (21 जून):  24 घंटे नहीं बीते जब हमने आपको खबर दी थी कि कैसे बैट्री चोरों ने मुंबई की रफ्तार थाम ली। 18 बैट्री के सहारे चल रही थी मुंबई की लाइफलाइऩ। आज की खबर ये है कि वही लाइफलाइन फिर फेल हो गई। कल बैट्री ने फेल किया था आज बरसात ने फेल किया। रातभर की रिमझिम बारिश ने मुंबई का वो हाल किया कि लोकल की पटरियां पानी में डूब गई और मुंबई की रफ्तार वाली जिंदगी पटरी से उतर गई। लेकिन योग के दिन इस रोग को देखने वाला कोई नहीं था। 

एक तरफ भारत सरकार योग में व्यस्त थी तो दूसरी तरफ मुंबई वाले अलग ही शीर्षासन में लगे थे। पूरा देश कपालाभाति और अनुलोम विलोम में लगा था और मुंबई वाले परेशान थे कि किसी तरफ से वक्त पर दफ्तर पहुंच जाएं। काम पर जाने को निकले लोग प्लेटफॉर्म पर खड़े थे और लोकल नदारत थी। मुंबई में लगातार दूसरा दिन था जब लोकल ने लोगों को बेहाल कर दिया था। सोमवार को बैट्री चोरी ने मुंबई लोकल की रफ्तार थाम ली थी तो अगले दिन बारिश ने अडंगा लगा दिया। पहली बारिश में ही मुंबई की लाइफलाइन हांफने लगी। 

मानसून ने मुंबई पर पहली फुहार बरसाई थी। शाम से रिमझिम बारिश हो रही थी। मौसम तो खुशगवार हो गया लेकिन एक रात की बारिश में बीएमसी की पोल खुल गई। सुबह सुबह पटरियों पर पानी जमा हो गया। लोकल ट्रेनें जहां की तहां अटक गई। लगातार दूसरे दिन की परेशानी से कल्याण और डोंबिवली के लोग इतने गुस्सा हो गए कि पटरियों पर उतर आए। हंगामा और पथराव भी हुआ। लेकिन उससे क्या होता। लोकल ट्रेन घिसटकर ही चलती रही।

पूरी मुंबई की रफ्तार एक रात की बारिश ने रोक दी। डोंबिवली, कल्याण, ठाणे, दादर और कुर्ला स्टेशन में लोगों की भारी भीड़ थी। और लोकल नदारद। एक ट्रेन का इंजन भी फेल हो गया। मुंबई लोकल की व्यवस्था चरमराई नहीं थी धराशायी हो गई थी। मुंबई का हाल ये था कि पटरियों से ट्रेन गायब थी औऱ सड़कों पर जाम लगा था। आजाद मैदान में टैक्सी यूनियन के लोग ओला ऊबर टैक्सी सर्विस के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने गाड़ियों में तोड़फोड़ की, हंगामा किया, कुछ लोगों के साथ मारपीट भी की। ट्रेन की लेटलतीफी से परेशान सड़क पर निकले लोग इस हंगामे में फंस गए। सड़कों पर लंबा जाम लग गया।

कोई बस्ती बहराइच बक्सर का हाल नहीं था ये। मुंबई का हाल था। देश की आर्थिक राजधानी । जहां उड़ने वाले लोगों की भरमार है वहां ट्रेन और सड़क पर चलने वाले लोग बेहाल हैं। और ये कोई एक दिन की बात नहीं। बरसों की यही कहानी है।