मुंबई में खत्म हुआ किसान आंदोलन, फडणवीस सरकार ने मानीं मांगें


न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (22 नवंबर): महाराष्ट्र के हजारों किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया है। किसानों ने यह फैसला गुरुवार शाम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से विधानभवन में मुलाकात के बाद लिया। सूखा राहत और आदिवासियों को भूमि अधिकार देने की मांग कर रहे किसान नेताओं के साथ सीएम ने खुद बातचीत कर उनकी मांगें मानने का भरोसा दिया, जिसके बाद मुंबई पहुंचे किसानों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। गुरुवार को दक्षिण मुंबई के आजाद मैदान पहुंचे किसानों ने आठ महीने पहले भी इस जगह पर ऐसा ही प्रदर्शन किया गया था।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मोर्चा नेताओं को चर्चा के लिए गुरुवार  दोपहर बाद विधान भवन में आमंत्रित किया था। बैठक में पहुंचे किसान नेताओं से मुलाकात करने के बाद सीएम ने आदिवासी किसानों को आश्वासन दिया कि सरकार उनके वन भूमि अधिकारों के दावों का इस साल दिसंबर तक निपटारा कर देगी। आदिवासी कल्याण मंत्री विष्णु सावरा ने बताया कि 3.6 लाख दावे हुए हैं जिनमें से 1.74 लाख दावों का आदिवासियों के पक्ष में निपटारा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इसी तरह सामुदायिक वन गतिविधि के लिए 12,000 दावे भी प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 7,700 का निपटारा कर दिया गया है।
किसानों की मांगों में सूखे के लिए मुआवजा और आदिवासियों के लिए भूमि अधिकारों का हस्तांतरण शामिल हैं। किसानों और आदिवासियों ने बुधवार को ठाणे से मुंबई के लिए दो दिवसीय मार्च शुरू किया था। मुंबई के सायन इलाके के सोमैया मैदान में रात गुजारने के बाद गुरुवार सुबह सभी किसान सोमैया मैदान से दादर और जेजे फ्लाइओवर होते हुए आजाद मैदान के लिए निकले थे। प्रदर्शन का आयोजन लोक संघर्ष मोर्चा नामक संगठन ने किया था। पानी के क्षेत्र में काम करने वाले मैग्सायसाय पुरस्कार विजेता डॉ राजेंद्र सिंह भी मार्च में शामिल रहे।
मार्च में भाग लेने वाले अधिकतर किसान ठाणे, भुसावल और मराठवाड़ा क्षेत्रों के थे। किसान स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने की मांग कर रहे हैं जिसके मुताबिक, किसानों को पानी और भूमि जैसे संसाधनों पर सुनिश्चित पहुंच और नियंत्रण मिलना चाहिए। मोर्चा की महासचिव प्रतिभा शिंदे ने कहा, ‘हम राज्य सरकार से अपनी दीर्घकालिक मांगों को पूरा करने के लिए लगातार कह रहे हैं, लेकिन प्रतिक्रिया लचर रही। इसके बाद हम यह आंदोलन शुरू करने के लिए मजबूर हुए।’