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मंदी की मार झेल रही मेटल इंडस्ट्री, 25 हज़ार लोगों के सामने रोजी रोटी संकट

इसी साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं, मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, लेकिन इस समय अर्थव्यवस्था की हालत बदतर है कोई भी इंडस्ट्री ठीक नहीं चल रही।

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इंद्रजीत सिंह, न्यूज 24 ब्यूरो, मुंबई(20 सितंबर):  इसी साल महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होने हैं, मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है, लेकिन इस समय अर्थव्यवस्था की हालत बदतर है कोई भी इंडस्ट्री ठीक नहीं चल रही। ऐसे में मेटल इंडस्ट्री का बुरा हाल है, क्योंकि देश मे नई इंडस्ट्री लगती है, नए निर्माण होते हैं गाड़ियां बिकती हैं तभी इस इंडस्ट्री में कारोबार होता है। मुंबई का लेमिंटन रोड इलाका मेटल कारोबार का हब है, लेकिन आज यहां कारोबार आधा हो गया है कारोबार घटने से मजदूरों का पलायन हो रहा है।

जिस वक्त लेमिंटन रोड के मेटल शॉप में खरीदारों की भीड़ होती थी उसी वक्त शॉप मालिक सो रहा है, जिस समय हाथ गाड़ी वाले इतने व्यस्त रहते थे कि मुह मांगा किराया मांगते थे उसी वक्त ये गाड़ी पर भाड़ा आने की राह देख रहे हैं। ललित बोत्रा की ये मेटल शॉप 50 साल पुरानी है कुछ साल पहले तक इनके पास पांच परमानेंट हेल्पर हुआ करते थे, लेकिन अब काम कम है तो 4 को हटाकर एक कर दिए हैं। उनका कहना है कि अब माल कभी बिकता है जरूरत तो एक कि भी नहीं है लेकिन ये वर्कर लम्बे समय से अपने पास है तो संभाल रहे हैं और इसी तरह का हाल ज़्यादातर दुकानदारों का है।

नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर, केमिकल, फार्मा, सुगर और रियल इस्टेट सहित सभी सेक्टर में मंदी है और इसका सीधा असर मेटल इंडस्ट्री पर पड़ रहा है। घरेलू मांग न के बराबर कई कम्पनियां बन्द हो रही हैं। कामगारों को घर भेजा जा रहा है, वहीं जीएसटी और  कुछ अन्य कारणों से एक्सपोर्ट भी न के बराबर है। एसोसिएशन के मुताबिक 50 से 60 फीसदी तक कारोबार प्रभावित हुआ है। आगे ऐसा ही चलता रहा तो लोगों के सामने रोजी रोटी का संकट गहरा सकता है।

मंदी की मार झेल रही इंडस्ट्री के सामने कई दिक्कतें हैं, जैसे इस कारोबार से ज़्यादातर कम पढ़े लिखे लोग जुड़े हैं। इसलिए इनको ई वे बिल के लिए सीए या अन्य पढ़े लिखे लोगों पर अधीन रहना पड़ता है। ज्यादातर दुकानदारों की ऑफिस या शॉप दक्षिण मुंबई में और गोडाउन कलम्बोली, भिवंडी, या वसई विरार एसे में जब ये थोड़ा थोड़ा माल मुंबई मंगवाते है तो एक ट्रक में कई लोग मिलकर मंगवाते हैं। अगर एक का ई वे बिल नहीं बना तो पूरा माल रुक जाता है। इसका असर भी उनके बिजनेस पर पड़ रहा है। इसलिए ये चाहते हैं कि 60 किलोमीटर के रेंज के लिए ई वे बिल न हो।इस समय इंडस्ट्री की लेमिंटन रोड पर 5000 ऑफिस और दुकाने हैं ,जिससे 25 हज़ार लोग डायरेक्ट और करीब 50000 लोग इनडाइरेक्ट जुड़े हैं। आर्थिक मंदी के कारण करीब 25 फीसदी लोगों का रोजगार जा चुका है यहां तक कि मजदूरों को पेट पालना मुश्किल हो रहा है, जो मजदूर हाथ गाड़ी खींचकर दिन में 700 से 800 कमाते थे उनका पेट पालना मुश्किल हो रहा है। दुकानदारों के मुताबिक पिछले 4 -6 महिनों से मंदी का असर ज्यादा दिखने लगा है। मार्केट में लिक्विडिटी नहीं है  जिन कंपनियों को ये माल देते हैं वो पहले 30 दिन का क्रेडिट लेती थी। 

अब 90 दिन का क्रेडिट ले रही हैं ऊपर से डंपिंग ड्यूटी कच्चे माल का दाम बढ़ा रहा है इसलिए इसलिए एक्सपोर्ट में हम चीन और वियतनाम से कंपटीशन नहीं कर पा रहे हमारा मॉल महंगा पड़ता है। इस समय मंदी की मार सभी इंडस्ट्री पर है सरकार कदम भी उठा रही है, लेकिन एक तो मंदी जाने यानि उठाये गए कदम का प्रभाव में वक़्त लगेगा दूसरे हर सेक्टर की अलग अलग समस्या है जरूरत है सभी को सुनने की।

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