सरकारी बंगले का मोह, अखिलेश के बाद अब मुलायम भी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली ( 28 मई ): उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ही पहुंच गए हैं। दरअसल सुप्रीम कोर्ट की ओर से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों के सरकारी बंगला खाली करने का आदेश दिया गया है। लेकिन नेता अब इसे खाली करने के बजाए इससे बचने का बहाना तलाश रहे हैं और देश की शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने लगे हैं। मुलायम सिंह ने 2 साल तक बंगला खाली ना करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से परमिशन मांगी है। उन्होंने उम्र और खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया है। साथ ही इस दौरान अपने लिए समुचित घरों का इंतजाम करने की बात भी कही है।मुलायम से पहले उनके बेटे और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस संबंध में कोर्ट का रुख कर चुके हैं। उन्होंने बंगला नहीं खाली करने के लिए अपनी सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई का सहारा लिया। अखिलेश यादव के निजी सचिव गजेंद्र सिंह ने भी पिछले हफ्ते राज्य संपत्ति अधिकारी को इस संबंध में पत्र लिखा था जिसमें समय की कमी और अभी तक कोई उचित जगह नहीं मिल पाने का तर्क देकर वक्त मांगा गया था।वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री मायावती भी बंगला नहीं खाली करना चाहती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर बताया कि वह जिस 13 माल रोड स्थित बंगले में रहती हैं उसे खाली नहीं कर सकतीं क्योंकि यह बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक और उनके राजनीतिक मेंटर कांशीराम का स्मारक है।मायावती 13 मॉल एवेन्यू नाम के जिस सरकारी बंगले में ही रहती हैं उसे दो सरकारी बंगलों को जोड़कर बनाया गया है। 2011 में इसे कांशीराम संग्रहालय में तब्दील कर दिया गया और इसके कुछ कमरों में ही वह रहती हैं।मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को भेजे पत्र में मायावती ने यह जानकारी दी कि 13 जनवरी, 2011 को 13 मॉल एवेन्यू को कांशीराम के नाम से स्मारक बना दिया गया, जिसके 2 कमरों में वह रहती हैं।