मुख्तार अंसारी की पार्टी ने सपा से मिलाया हाथ, कभी CM अखिलेश ने किया था विरोध

लखनऊ (21 जून): उत्तर प्रदेश की सियासत में आज की बड़ी खबर है। माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय होना। मुख्तार अंसारी तो अभी जेल में है, और उनकी पार्टी के अध्यक्ष मुख्तार के बाई अफजाल अंसारी हैं। जिन्होंने आज अपनी पार्टी का विलय समाजवादी पार्टी में करा दिया है। आपको बता दें मुख्तार अंसारी की पार्टी के अभी दो विधायक हैं। मुख्तार के कौमी एकता दल का प्रभाव बनारस और आस पास के जिलों में है।

यहां ये भी आपको याद दिला दें कि 2012 के चुनावों से पहले जब आपराधिक बैकग्राउंड वाले डी पी यादव समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे तो अखिलेश यादव ने विरोध किया था। लेकिन अब अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने मुख्तार अंसारी से हाथ मिला लिया है।

डॉन मुख्तार अंसारी के विलय की पुष्टि खुद समाजवादी पार्टी ने की। इसके साथ ही यूपी में कानून व्यवस्था को लेकर यूपी की अखिलेश सरकार के दावों पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए। एक तरफ यूपी में लगातार अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है तो दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी में दबंगों का विलय हो रहा है। 

कौन हैं मुख्तार अंसारी मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में ही हुआ था। उसके दादा मुख्तार अहमद अंसारी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। जबकि उनके पिता एक कम्यूनिस्ट नेता थे।  मुख्तार अंसारी के आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की खबर मिलने के बाद बसपा ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। बसपा से निकाले जाने के बाद दोनों अंसारी भाईयों ने 2010 में नई पार्टी कौमी एकता दल (QED) का गठन किया।

चुनाव और जीत 2005 में मऊ में भड़की हिंसा के बाद अंसारी पर कई आरोप लगे, जिन्हें खारिज कर दिया गया। हालांकि इसी दौरान अंसारी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। वे तभी से जेल में बंद हैं। मुख्तार अंसारी ने दो बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और दो बार निर्दलीय। उन्होंने जेल से ही तीन चुनाव लड़े हैं। पिछला चुनाव उन्होंने 2012 में कौमी एकता दल से लड़ा और विधायक बने। वह लगातार चौथी बार विधायक हैं। पूर्वांचल में उनका काम उनके भाई और बेटे संभाल रहे हैं।