भोपाल का दरिंदा मां को मारकर 5 साल तक लेता रहा पेंशन

नई दिल्ली ( 6 फरवरी ): भोपाल में गर्लफ्रेंड की हत्या कर चबूतरे में दफन किए जाने के मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे अहम यह कि आरोपी उदयन दास मां की हत्या के पांच साल बाद तक उनकी पेंशन बगैर लाइफ सर्टिफिकेट के कैसे लेता रहा? बता दें कि आरोपी ने कबूल किया है कि उसने गर्लफ्रेंड आकांक्षा शर्मा को भोपाल में और माता-पिता को रायपुर में मारकर जमीन में दफन कर दिया था। रविवार को रायपुर में उसकी निशानदेही पर हुई खुदाई में हड्डियां भी मिलीं।

1-उदयन की मानें तो उसने 2011 में अपने माता-पिता की हत्या कर दी थी। सवाल ये कि वो मां की पेंशन बैंक से कैसे निकालता रहा? जबकि, रूल्स के मुताबिक, पेंशनर को हर साल खुद बैंक जाकर लाइफ सर्टिफिकेट देना होता है।

2-उदयन की मां भोपाल के विंध्याचल भवन में एनालिस्ट थीं। क्या कभी उनके साथ काम करने वालों ने उनकी खोज-खबर नहीं ली?

3-उदयन के परिवार में और कौन-कौन हैं? उसके रिश्तेदार कहां हैं? क्या उन लोगों ने इनसे कभी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश नहीं की? ये डिटेल उदयन के माता-पिता की सर्विस बुक से मिल सकती है।

4-उदयन अगर साइको है और उसकी जिंदगी इतनी बेतरतीब है तो फिर आकांक्षा उसे बर्दाश्त क्यों करती रही? क्या उसने कभी अपने घर कोलकाता वापस जाने के बारे में नहीं सोचा? ये सवाल इसलिए अहम है, क्योंकि उदयन के घर जब पुलिस पहुंची तो वहां हर सुख-सुविधा का सामान था, लेकिन पूरे घर में गंदगी थी।

5-आकांक्षा की फैमिली ने उसकी बातों पर इतनी आसानी से कैसे भरोसा कर लिया कि वह अमेरिका में रह रही है। जब उससे जुलाई 2016 से कॉन्टैक्ट नहीं हो रहा था तो फिर उन्होंने 5 महीने बाद दिसंबर में ही पुलिस से शिकायत क्यों की?

6-बताया जा रहा है कि आकांक्षा के किसी दोस्त से बात करने से उदयन खफा था। इसलिए उसने आकांक्षा को मारा। सवाल ये कि आकांक्षा का वो दोस्त कौन है? और इससे भी जरूरी कि पुलिस उसका पता लगाकर पूछताछ अब तक क्यों नहीं कर पाई है? जबकि आकांक्षा की कॉल डिटेल्स निकाली जा चुकी हैं।

7-उदयन ने रायपुर में माता-पिता की बॉडी दफनाने के लिए 8-10 फीट गहरा गड्ढा कराया या खुद किया। यहां सवाल ये कि पड़ोसियों ने इसके बारे में उदयन से कोई सवाल नहीं किया? क्या उन्हें कोई शक नहीं हुआ?

 

8. उदयन ने रायपुर वाला मकान बेचने के लिए एक शख्स को 30 लाख रुपए में पॉवर ऑफ अटॉर्नी दी। उस शख्स का बैकग्राउंड क्या है? उसने पावर ऑफ अटॉर्नी क्यों ली?

9- उदयन ने रायपुर का मकान बेचने के लिए मां का डेथ सर्टिफिकेट होशंगाबाद से बनवाया (ये उसने पुलिस को बताया है)। सवाल ये कि सर्टिफिकेट बनवाने के लिए श्मशान घाट की रसीद लगती है। क्या जाली रसीद का इस्तेमाल किया गया? या फिर बिना रसीद के ही किसी और तरीके से सर्टिफिकेट हासिल किया गया?

10-उदयन को उसके घर पर पुलिस के आने की इन्फॉर्मेशन पहले से कैसे मिल गई थी? पुलिस के आने की इन्फॉर्मेशन मिलने के बाद ही उदयन ने खुद को कमरे में बंद कर लिया था। कहा जा रहा है कि उसने फंदा बनाकर फांसी लगाने की तैयारी भी कर ली थी। ये उसने खुद पुलिस को बताया है।

क्या है मामला?

- पश्चिम बंगाल के बांकुरा में रहने वाले देवेंद्र कुमार शर्मा की बेटी आकांक्षा उर्फ श्वेता (28) की 2007 में उदयन नाम के लड़के से ऑरकुट पर दोस्ती हुई थी।

- जून 2016 में घर से नौकरी करने की बात कहकर आकांक्षा भोपाल आ गई। यहां वह उदयन के साथ साकेत नगर में रहने लगी।

- उसने परिवारवालों को बताया कि मैं अमेरिका में नौकरी कर रही हूं।

- जुलाई 2016 के बाद आकांक्षा के परिवारवालों से बात होनी बंद हो गई। भाई ने नंबर ट्रेस कराया तो लोकेशन भोपाल की निकली।

- परिवार के लोगों को शक था कि आकांक्षा उदयन के साथ रह रही है। दिसंबर 2016 में आकांक्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हुई।

- एक महीने की जांच के बाद पुलिस उसके ब्वॉयफ्रेंड उदयन के घर पहुंची और उसे गिरफ्तार कर लिया।

- पूछताछ में उसने आकांक्षा की हत्या की बात कबूली। बाद में अपने माता-पिता की हत्या की बात भी बताई।

उदयन ने आकांक्षा की हत्या क्यों की थी?

- आकांक्षा अपने एक दोस्त से फोन पर अक्सर बात करती थी। यह बात उदयन को नागवार गुजरती थी।

- 14 जुलाई 2016 की रात आकांक्षा और उदयन के बीच जमकर बहस हुई थी। आकांक्षा सो गई, लेकिन उदयन रातभर जागता रहा। मारने की प्लानिंग करता रहा।

- 15 जुलाई की सुबह उसने तकिए से मुंह दबाकर आकांक्षा की हत्या कर दी। फिर उसे बॉक्स में बंद कर अपने घर में ही सीमेंट के चबूतरे में दफन कर दिया।

कौन है उदयन?

- उदयन के पिता वीके दास भेल में फोरमैन थे। उदयन की मां विध्यांचल भवन में एनालिस्ट की पोस्ट से रिटायर हुई थीं।

- मां की पेंशन लगभग 30 हजार रुपए आती है। फेडरल बैंक एमपी नगर शाखा में पिता के साथ उदयन का ज्वाइंट अकाउंट है।

- इन्ही पैसों से उदयन और आकांक्षा का खर्च चलता था।