मध्य प्रदेश के धार में पसरा है सांप्रदायिक तनाव

रेणु अग्रवाल, धार (25 जनवरी): मध्य प्रदेश के धार में सांप्रदायिक तनाव पसरा है। विवाद वही मंदिर और मस्जिद का है। धार के भोजशाला में हिंदू समाज मां सरस्वती की पूजा करता है तो मुस्लिम समुदाय कमाल मौलाना मस्जिद में नमाज अता करता है। आने वाली बसंत पंचमी शुक्रवार को है। हिंदू समाज पूजा करने पर अड़ा है तो मुसलमान जुमे की नमाज से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

मध्य प्रदेश के धार में भोजशाला मंदिर है या कमाल मौलाना मस्जिद इस पर विवाद वर्षों से है। अदालत का फैसला आने तक प्रशासन ने दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग व्यवस्था कर रखी है। शुक्रवार को मुसलमान जुमे की नमाज अता करेंगे और मंगलवार का दिन हिंदुओं की पूजा के लिए आरक्षित होगा, लेकिन 2016 के बसंत पंचमी ने सारी व्यवस्था चौपट कर दी है।   धार में सांप्रदायिक तनाव को थामे रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। रविवार को यहां साध्वी ऋतंभरा ने बड़ी हिंदू सभा की, जिसमें बसंत पंचमी के दिन भोजशाला में सरस्वती अराधना का फैसला लिया गया। 2013 में ऐसा ही मौका आया था, जब सांप्रदायिक तनाव की वजह से कर्फ्यू तक लगाना पड़ा था। उसके पहले 2003 और 2006 में भी सांप्रदायिक तनाव की स्थितियां बनी थीं।

धार के भोजशाला का इतिहास: परमार वंश के राजा भोज ने 1034 में धार में सरस्वती सदन की स्थापना की थी। इसे महाविद्यालय के तौर पर भोजशाला के नाम से जाना जाता था। यहां पर सरस्वती की प्रतिमा की स्थापना की गई थी। कहा जाता है कि यहां 1456 में मोहम्मद खिलजी ने मौलाना कमालुद्दीन दरगाह का निर्माण करवाया। 1857 में भोजशाला परिसर में खुदाई के दौरान सरस्वती की प्रतिमा निकली थी। हालांकि धार स्टेट ने ही यहां मुससलमानों को नमाज पढ़ने की इजाजत दी थी।