एवरेस्ट नहीं ये है दुनिया की सबसे ऊंची चोटी!

नई दिल्ली (18 मई) :  आपने हमेशा यही सुना होगा कि माउंट एवरेस्ट (हिमालय) दुनिया की सबसे ऊंची चोटी है। लेकिन अगर आपको पता चले कि सबसे ऊंचा पर्वत शिखर कोई और है तो आपको कैसा लगेगा?  जी हां, वैज्ञानिक कुछ ऐसा ही कह रहे हैं। माउंट एवरेस्ट को इक्वाडोर के चिमबोराज़ो ने ऊंचाई के मामले में पीछे छोड़ दिया है।

पारंपरिक माप के आंकड़ों की माने तो एवरेस्ट अब भी समुद्र तल से 8,848 मीटर की ऊंचाई के साथ शीर्ष पर है। लेकिन पृथ्वी की संरचना के हिसाब से अंतरिक्ष के सबसे नज़दीक पृथ्वी पर एवरेस्ट नहीं बल्कि इक्वाडोर का चिमबोराज़ो पर्वत शिखर है। एवरेस्ट सिर्फ समुद्र तल से ऊंचाई को लेकर सबसे ऊंचा है। लेकिन आप पृथ्वी के केंद्र से नापे तो ऊंचाई के मामले में बाज़ी चिमबोराज़ो के हाथ लगती है। वास्तविकता तो ये है कि पृथ्वी के केंद्र से ऊंचाई के मामले में एवरेस्ट टॉप 20 पर्वत शिखरो में भी नहीं आता।    

ये दिलचस्प नतीजे इसलिए आए क्योंकि पृथ्वी पूरी तरह वृत्ताकार नहीं है बल्कि इसकी सबसे ऊपर और सबसे नीचे चपटी संरचना है। वहीं मध्य में ये उभरी हुई है।

ये संरचना इक्वेटर (भूध्य रेखा) के पास पड़ने वाले पर्वतों को ऊंचाई के मामले में लाभ देता है। यही वजह है कि इक्वाडोर का चिमबोराज़ो सबसे अधिक ऊंचाई में बाज़ी मारता है। ये पर्वत पृथ्वी के मध्य के उभरे हुए हिस्से के बहुत नज़दीक है। वहीं एवरेस्ट मध्य से काफ़ी दूर हो जाता है।

माउंट एवरेस्ट कुछ और पैमानों में भी सबसे ऊंचा नहीं है। हवाई के मौना किया पर्वत को टॉप से बॉटम तक नापा जाए तो ये ऊंचाई एवरेस्ट से कहीं ज़्यादा है। लेकिन इस पर्वत का बॉटम और बहुत सा हिस्सा समुद्र के नीचे हैं। इसलिए ये समुद्र तल से एवरेस्ट की रिकॉर्ड ऊंचाई से मेल नहीं खाता।

एवरेस्ट के नाम जहां सबसे अधिक ऊंचाई का रिकॉर्ड दर्ज़ है वहीं इसे पर्वतारोहियों के लिए सबसे मुश्किल चढ़ाई भी माना जाता है। वहीं चिमबोराज़ो पर अपेक्षाकृत अधिक आसानी से चढ़ा जा सकता है। इस पर्वत की चढ़ाई दो हफ्ते में पूरी हो जाती है। वहीं एवरेस्ट पर चढ़ाई में इससे कहीं ज़्यादा वक्त लगता है।