न हाथ न पैर फिर भी फतह कर ली 14000 फीट से ऊंची चोटी

नई दिल्ली (27 मई): हौसला मजबूत हो तो बड़े से बड़ा पहाड़ की चोटी भी चोटी छोटी पड़ जाती है। ये लाइनें जेमी एंड्रयू पर एकदम सटीक बैठती हैं। उनकी कहानी किसी के भी मनोबल को ऊंचा कर सकती है। 44 वर्षीय जेमी एंड्रयू ने जिस शौक के चलते आज से 15 साल पहले अपने हाथ-पैर गंवा दिए थे, उसी को पूरा करने के लिए 14,691.6 फीट (4,478 मीटर) ऊंची मैटरहॉर्न माउंटेन (माउंट सेरविने) को फतह किया है। खास बात है कि एंड्रयू जब पहले हाथ-पैर रहते हुए पर्वतारोहरण करते थे, तब भी उन्होंने इतनी ऊंचाई कभी नहीं चढ़ी थी।

यह अल्प्स पर्वत और यूरोप की सबसे ऊंची चोटी है। इस चोटी पर 1865 से पर्वतारोहरण की शुरुआत होने के बाद से अब तक करीब 500 से अधिक पर्वतारोहियों की मौत हो चुकी है।  

जेमी एंड्रयू और उनके दोस्त जेमी फिशर 15 साल पहले मोंट ब्लांक में 4000 मीटर ऊंची लेस ड्रोइट्स माउंटेन में बर्फीले तूफान में फंस गए थे। बर्फीली हवाएं 90 मील प्रति घंटे की गति से बह रहीं थीं। इस दौरान वह 4 दिन वहां फंसे रहे और फिशर की मौत हो गई।

हालांकि, बचाव दल एंड्रयू को वहां से निकाल लाया, लेकिन उनके हाथ-पैर ठंड से बुरी तरह से प्रभावित हुए। डॉक्टरों के पास उनके हाथ- काटने के अलावा कोई भी दूसरा विकल्प नहीं था। ऑपरेशन के बाद उन्होंने कृत्रिम हाथ-पैरों को अपनाया और 14,691.6 फीट की उंचाई को नाप डाला।