मदर टैरेसा को मिलेगी संत की उपाधि, जानें कैसे बनते हैं संत...

नई दिल्ली (3 सितंबर): मदर टेरेसा भी ज़िंदादिली की एक ऐसी मिसाल थीं, जिन्होंने जन्म के बाद होश संभालते ही दूसरों के लिए जीना शुरु कर दिया था। उन्होंने जो किया वो इतिहास के पन्नों में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है और अब रविवार को पोप फ्रांसिस वेटिकन के सेंट पीटर्स स्क्वायर में 5 लाख श्रद्धालुओं के सामने उन्हें संत की मानद उपाधि से सम्मानित करेंगे।

मदर टेरेसा हमेशा कहती थीं, ''मैं जन्म से अल्बानिया की हूं। मैं नागरिकता से भारत की हूं। मैं विश्वास से एक कैथलिक नन हूं। मेरे उपदेश पूरी दुनिया के लिए हैं। दिल से मैं सिर्फ़ जीसस के लिए हूं। मदर टेरेसा बेशक पहली बार दुनिया के सामने संत की घोषित की जा रही हों, लेकिन करोड़ों लोग मानते थे वो ज़िंदा संत हैं, जो इस धरती पर सिर्फ लोगों की भलाई के लिए आईं हैं।

आमतौर पर किसी की मृत्यु के बाद 5 साल तक उसे संत बनाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की जा सकती। सेंट बीड को तो उनकी मृत्यु के 1162 साल बाद संत की उपाधि से सम्मानित किया गया था, लेकिन मदर टेरेसा के केस में इस नियम को बदल दिया गया।

कैसे बनते हैं संत... पहले व्यक्ति के जीवन में किए गए कार्यों का मूल्यांकन किया जाता है। मूल्यांकन के बाद बिशप उसे Servant of God यानी ईश्वर का सेवक घोषित करते हैं। इसके बाद ये मामला धार्मिक सभा में पोप के सामने जाता है। फिर पोप उस व्यक्ति का जीवन देखने के बाद उसे आदरणीय की उपाधि देते हैं। पहले चमत्कार के मान्य होने पर उसे धन्य घोषित किया जाता है। दूसरे चमत्कार के मान्य होने पर उसे लैटिन भाषा की प्रार्थना में संत घोषित किया जाता है।

किसी को भी संत तब माना जाता है जब उन्होंने अपने जीवन में कम से 2 ऐसे चमत्कार किए हों जिन्होंने विज्ञान को भी हैरत में डाल दिया था। मदर टेरेसा को साल 2003 में Blessed यानी संत घोषित किया गया था। धन्य की उपाधि उन्हें तब मिली जब एक महिला के पेट का ट्यूमर उन्होंने अपनी प्रार्थना से ठीक कर दिया था।

साल 2002 में वेटिकन ने इसे मदर टेरेसा का पहला चमत्कार माना। ये संत बनाए जाने की प्रक्रिया का पहला चरण है। पहले चमत्कार पर करीब 3 लाख श्रद्धालुओं ने रोम में मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने की मांग की थी। मदर टेरेसा का दूसरा चमत्कार काफी हैरान करने वाला था। फर्नांडा और उनकी पत्नी बच्ची चाहते थे। डॉक्टर्स ने उन्हें बताया कि मैंने कई एंटीबायोटिक लिए हुए हैं, इसलिए मेरे लिए बच्चे पैदा करना बहुत मुश्किल है। पिता बनने की 1 फीसदी संभावना भी नहीं है। कुछ महीनों बाद जब हम प्रार्थना के बाद घर पर आए तो मुझे पता चला

कि फर्नांडा प्रेगनेंट हैं। मैं बहुत खुश था। बाद में मेरे 2 बच्चे हुए। ये सबकुछ मदर टेरेसा के चमत्कार की वजह से ही है। मार्सिलो की पत्नी फर्नांडो भी कहती हैं कि वो हमेशा ही मदर टेरेसा की प्रार्थना किया करती थीं। यानी इस परिवार में सिर्फ मदर टेरेसा की वजह से ही खुशियां आईं। साल 2008 में मार्सिलो का ब्रेन ट्यूमर पूरी तरह से ठीक हो गया था और पोप फ्रांसिस ने उनके दूसरे मेडिकल चमत्कार को मान्यता दे दी थी। इस तरह मदर टेरेसा के संत बनने का रास्ता साफ हो गया। मैसेडोनिया में पैदा हुईं मदर टेरेसा ने अपनी ज़िंदगी के 68 गरीबों की सेवा में गुज़ार दिए। दुनिया के असहाय और गरीबों की सेवा के लिए उन्हें 1979 को नोबेल शाँति पुरस्कार दिया गया था।