UP: मृत बेटी को अस्पताल के चौखट पर लेकर रात भर रोती रही मां, क्योंकि...

नई दिल्ली (5 सितंबर): यूपी के मेरठ से एक बार फिर से इंसानियत को शर्मसार करने वाले तस्वीरें सामने आई है। यहां के जिला अस्पताल में एक मां अपनी दम तोड़ चुकी ढाई साल की मासूम के शव को लेकर इमरजेंसी की चौखट पर रात भर बैठी रोती रही। बेटी के शव को निजी एंबुलेंस से गांव ले जाने के लिये ढाई हजार रूपये नही थे। अस्पताल के डाक्टरों ने शव को निजी एंबुलेंस से गांव ले जाने की सलाह दे डाली।   रोती-बिलखती इरफाना की लगभग तीन साल की मासूम बेटी बुखार के चलते दम तोड़ गई। बागपत जिले के गौरीपुर निवाड़ा की रहने वाली इरफाना की बेटी गुलनाज को लगभग एक महीने पहले वायरल हो गया था। बुखार म़े तप रही मासूम का बागपत और बड़ौत में उपचार कराया गया, लेकिन आराम न होने पर स्थानीय डाक्टरों ने उसे मेरठ रेफर कर दिया। 

बृहस्पतिवार को रात्रि में बारह बजे के करीब इरफाना बच्ची को लेकर मेरठ जिला अस्पताल पहुंची। इरफान का कहना है कि वहा पर कोई डॉक्टर मोजूद नहीं था लेकिन कुछ देर बाद एक डॉक्टर आया जिसने उन्हें खून लाने को कहा लेकिन बेबस माँ बिना पैसो के खून लाने में असमर्थ थी उसने डॉक्टर को कहा भी लेकिन किसी ने एक ना सुनी जिससे कुछ देर बाद गुलनाज की सासों की डोर टूट गयी और उसे डॉक्टरो ने मृत घोषित कर दिया। करीब दो घंटे तक शव को हाथों में उठाये गांव ले जाने के लिये वह सरकारी एंबुलेंस से मिन्नत करती रही। 

एंबुलेंस संचालक ने दूसरे जिले से जुड़ मामला होने के कारण ले जाने से इंकार कर दिया। फरजाना का आरोप है कि वह अस्पताल के डाक्टरों से रहम की भीख मांगती रही की उसे एंबुलेंस से गांव तक छुड़वा दें। डाक्टरों ने सहायता करने की जगह उसे निजी एंबुलेंस से शव ले जाने की सलाह दे डाली। निजी एंबुलेंस शव को ले जाने के लिये ढाई हजार रूपये और पन्द्रह सो रूपये की मांग की गयी। आभागी मां ने अपने कलेजे के टुकड़े का वास्ता देते हुये पैसे देने में असमर्थता जातायी। ऐसे में सरकारी स्वस्थ सेवाओ की संवेदनहीनता पर एक बार फिर से सवाल उठा दिए क्योकि सरकारी सिस्टम ने ही खुद को बेबस बताकर हाथ खड़े कर दिए थे।