दाल में क्यों है 'काला'! उत्‍पादन बढ़ाकर भी रो रहा है किसान, आम जनता को देने पड़ रहे भारी दाम, जानिए

डॉ. संदीप कोहली,

नई दिल्ली (6 जनवरी): पिछले साल दालों के बड़े दामों को लेकर सरकार की बड़ी फजीयत हो रही थी। किसानों पर उत्पादन बढ़ाने का दवाब था, क्योंकि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि दालों के दाम अच्छे मिलेगें। हुआ भी ये ही, किसानों ने उत्‍पादन बढ़ाया दलहन की बुआई 13 फीसदी बढ़कर 131.12 लाख हैक्टेयर (2015-16) के मुकाबले 148.11 लाख हैक्टेयर(2016-17) हो गई। अब बुआई बड़ी है तो पैदावार भी बढ़ेगी। वर्ष 2016-17 में अनुमान लगाया गया है कि दालों का उत्पादन 1.67 लाख टन से बढ़कर 2.1 करोड़ टन हो जाएगा। लेकिन अब उठता है बड़ा सवाल, क्या किसानों को फसल का उचित दाम मिल रहा है, जो सरकार ने उनसे वायदा किया था। उत्तर है नहीं! न्यूज़24 के एसोशिएट एडिटर डॉ. संजीव त्रिवेदी ने अपनी एक रिपोर्ट में इसका खुलासा किया है। राजस्थान और गुजरात में दलहन का उत्पादन करने वाले किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। कारण है सरकार का बफर स्‍टॉक अब पूरा हो चला है और प्राइवेट ट्रेडर्स स्‍टॉक लिमिट की बात कहकर खरीद से दूरी बनाए हुए हैं। रही सही कसर नोटबंदी ने पूरी कर दी है। कुल मिलाकर किसान इन सब में फंसकर अपनी पैदावार को औने-पौने दामों में बेचने को मजबूर है।

क्यों नहीं मिल रहा किसानों को उचित दाम...

    * दलहन की बुआई 13 फीसदी बढ़कर 131.12(2015-16) के मुकाबले 148.11 लाख हैक्टेयर(2016-17) हो गई।

    * विगत 20 वर्षो से दलहनों की औसत उपज(1990 में 580 से 2010 में 607 किग्रा प्रति हैक्टर) बड़ी है।

    * खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने खुद बताया है कि घरेलू उत्पादन 2 से 2.1 करोड़ टन होने की उम्मीद है।

    * दिसंबर 2016 तक सरकार 1.65 लाख टन दालों की खरीद की जा चुकी है 400 केंद्रों पर खरीद जारी है।

    * इस सब के बावजूद दलहन के किसानों को उनकी फसल के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं।

    * शुरूआत में मूंग दाल MSP 5225 से नीचे 3000 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी।

    * दिसंबर 30 तक मूंग दाल MSP 4500 से 5000 रुपए प्रति क्विंटल पर ही थी।

    * इसी तरह उड़द भी 5000 रुपए MSP से नीचे 4000 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रही है।

    * अरहर की दाल भी 5200 रुपए प्रति क्विंटल से नीचे 3000 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रही है।

अलग-अलग जगहों पर दाम (रुपए प्रति क्विंटल)

मूंग (न्यूनतम समर्थन मुल्य 5225 रुपए)मसूर (न्यूनतम समर्थन मुल्य 3800 रुपए)उड़द (न्यूनतम समर्थन मुल्य 5000 रुपए)अरहर (न्यूनतम समर्थन मुल्य 5050 रुपए)
दिल्ली 4600-50005300-670060005050
जयपुर4600-6500-
लुधियाना3500-45005000-4400
मुंबई4000-450057006400-65004800

दालों के दाम (रुपए प्रति किलो)

सरकारी (मॉडल प्राइस)    फुटकर       बड़ी दुकानें
मूंग    75               95135
मसूर   7090130
उड़द    90110150
अरहर  110125160

दालों का उत्पादन, आयात और मांग (आंकड़े मिलियन टन में)

2011-122012-132013-142014-152015-16
उत्पादन17.118.319.817.416.7
आयात3.54.03.54.65.5
मांग2525.526.226.827.1

स्‍टॉक लिमिट हटाने की मांग...

    * ऑल इंडिया दाल मिल एसोसिएशन की मांग है कि दालों का उत्पादन बड़ा है ऐसे में भंडारण सीमा समाप्त कराने के लिये जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।

    * इंडियन पल्‍सेस एंड ग्रेन एसोसिएशन (इपगा) की भी कहना है कि मौजूदा समय में जब उत्‍पादन अच्‍छा है सरकार को स्‍टॉक लिमिट हटा लेनी चाहिए।

    * स्‍टॉक लिमिट खत्‍म न होने के चलते देश की 10 हजार से अधिक दाल मिलें भी अपनी क्षमता से कम काम कर रही हैं।

    * उन्‍होंने कहा कि सरकार को दालों को पीडीएस सिस्‍टम में शामिल करना चाहिए, इससे किसानों को वाजिब दाम भी मिलेंगे।

दलहन उत्पादन पर एक नजर...

    * दुनिया में दालों की खेती 70.6 मिलियन हैक्टर में की जाती है।

    * दुनिया में दालों का उत्पादन 61.5 मिलियन टन होता है।

    * दलहनों की विश्व औसत उपज 871 किलो ग्राम प्रति हैक्टर है।

    * भारत में दलहनों की औसत उपज 607 किग्रा प्रति हैक्टर है।

    * भारत में दालों का उत्पादन मांग की तुलना में नहीं बढ़ रहा है।

    * 130 करोड़ की जनसंख्या के कारण दालों खपत कम होती जा रही है।

    * 2005-06 के दौरान देश में दलहनों का कुल उत्पादन 134 लाख टन था।

    * जो 2016-17 में बढ़ कर 2.1 करोड़ टन होने का अनुमान है।

    * जबकि देश में दालों की वार्षिक खपत औसतन 2.71 करोड़ टन है

    * वार्षिक खपत के लिए सरकार 20 लाख टन दाल के बफर स्टॉक को भी बना रही है

    * बफर स्टॉक का उपयोग जब कीमतें बढ़ेंगी उस समय किया जायेगा।

    * 10 लाख टन दालों की खरीद घरेलू मार्केट से ही की जाएगी।

    * जबकि 10 लाख टन जून 2017 तक इंपोर्ट की जाएगी।

    * भारत में 2016 में 35 लाख टन दालों का इंपोर्ट किया गया था।

    * इसमें से 4 लाख टन दालें सरकार ने आयात की हैं।

    * क्योंकि 2015-16 में दालों का उत्पादन 1.67 लाख टन ही हुआ था।

    * भारत में सबसे ज्यादा (77 प्रतिशत) दलहन उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्य हैं।

    * मध्य प्रदेश (24 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश(16 %), महाराष्ट्र(14%), राजस्थान(6%)।

    * आन्ध्र प्रदेश (10%) और  कर्नाटक (7 प्रतिशत) राज्य है।

    * 23 % में गुजरात, छत्तीसगढ़, बिहार, उड़ीसा, झारखण्ड आते हैं।