अब बंदरों के लिए फैमिली प्लानिंग

नई दिल्ली(5 अगस्त): आगरा में बंदरों की बढ़ती संख्या मुसीबत बनती जा रही है। इस समय शहर में लगभग 8,000 बंदर हैं, लेकिन अगर इनके प्रजनन पर नियंत्रण न किया गया तो अगले छह सालों में यह बढ़कर 2.16 लाख हो जाएगी।

- विशेषज्ञों का मानना है कि शहर में खाने-पीने की चीजों की उपलब्धता और लोगों का इनके प्रति सहज रवैया इसके लिए जिम्मेदार है।

- एक एनजीओ ने जिला प्रशासन और आगरा डिवेलपमेंट अथॉरिटी के साथ मिलकर बंदरों के प्रजनन पर नियंत्रण करने के लिए टीकाकरण शुरू किया है। अब तक 317 बंदरों को टीका लगाया जा चुका है। हालांकि स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। इस प्रॉजेक्ट के तहत 552 बंदरों को पकड़ा गया जिसमें से 317 को वंध्यीकृत किया गया। इससे आगले छह साल में बंदरों की संख्या में 7,200 की होने वाली वृद्धि को नियंत्रित कर लिया गया है।

- एनजीओ के सहसंस्थापक कार्तिक सत्यनारायण ने बताया कि आगरा में 2022 तक बंदरों की संख्या 2.16 लाख हो जाने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि एक मादा बंदर 18 महीने में तीन बच्चे पैदा करती है।

- इस वर्ष मार्च में प्रशासन ने एनजीओ के साथ मिलकर बंदरों के बंध्यीकरण का प्रॉजेक्ट शुरू किया है। एनजीओ के सहसंस्थापक ने कहा, 'लोग खाने-पीने की चीजें जहां-तहां फेंक देते हैं। आगरा के मंदिरों से भी बहुत सारी खाने की सामग्री निकाल कर फेंकी जाती है। इस वजह से आगरा में जानवरों, खासकर बंदरों की संख्या पर नियंत्रण कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है।' उन्होंने कहा कि बंदरों के प्रजनन पर नियंत्रण करने का यह अभियान हॉन्ग कॉन्ग के अभियान से प्रेरित है।