जयपुर में बंदरों का आतंक, ली बच्चे की जान

केजे श्रीवत्सन, जयपुर (26 अप्रैल): जयुपर में बंदरों के आतंक ने लोगों का जीना मुहाल किया हुआ है। शहर के कई इलाके बंदरों के उत्पात से ख़ौफ़ज़दा हैं। पिंक सिटी के मंकी गैंग की वजह से 14 साल के एक बच्चे की मौत हो चुकी है। 60 से ज्यादा लोगों को ये मंकी गैंग ज़ख्मी कर चुका है।

14 साल के नक्षत्र के घर में अब मातम है। मां रो-रो कर बेसुध हो चुकी हैं, पिता की आंखे पथरा गई हैं। घरवालों के आंसू थामे नहीं थम रहे हैं। नक्षत्र आठवीं क्लास में पढ़ता था। 2 मई से होनी वाली परीक्षा की तैयारी कर रहा था। रविवार को वो पढ़ने के लिए छत पर चला गया, तभी बंदरों ने धावा बोल दिया। नक्षत्र का पैर फिसला और वो छत से गिर गया। उसे अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।

नक्षत्र दो बहनों का इकलौता भाई था और परिवार में सबसे छोटा था। बंदरों के आतंक ने नक्षत्र के परिवार की खुशियां छीन ली हैं। नक्षत्री की मौत से उसके पिता इस कदर टूट चुके हैं कि बोलते नहीं बन रहा है। उनकी बस इतनी ही दरख्वास्त है कि प्रशासन ऐसे इंतज़ाम करे कि बंदरों का आतंक किसी और परिवार की खुशियां न छीन सके।

वैसे तो पूरा जयपुर ही बंदरों के आतंक से पीड़ित है, लेकिन कुछ इलाकों में प्रकोप ज्यादा है। ज्यादा आदर्श नगर, जनता कॉलोनी और इसके पास तुलसीदास जी की बगीची, अमर नाथजी की बगीची, सवाई पाव की बगीची, जनता पार्क व पुलिस वायरलेस क्वाटर इलाके में बंदरों से सबसे ज्यादा उत्पात मचाया हुआ है। बंदर अब तक 60 से ज्यादा लोगों को ज़ख्मी कर चुके हैं।

बंदरों का आतंक इस कदर है कि लोग घरों से बाहर निकलने में डरते हैं। अपने दरवाजों, बालकनी पर खड़े होने से डरते हैं। छत पर जाने से भी लोगों को डर लगता है। बदंरों से लोग इस कदर ख़ौफज़दा हैं कि कई इलाको में तो गलियां सूनी रहती हैं। नगर निगम कदम उठाने की बात करता है, लेकिन विरोधी इसे सरकार की नाकामी बताते हैं।

जयपुर को पूरी दुनिया में पिंक सिटी के नाम से जाना जाता है। ये एक बड़ा टूरिस्ट प्लेस भी है। सरकार को जयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने का सपना भी दिखाती है, लेकिन सवाल ये है कि जब सरकार बंदरों के आतंक से जयपुर को छुटकारा नहीं दिला पा रही है तो स्मार्ट सिटी का सपना कैसे पूरा करेगी।