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सड़कों पर धर्म का प्रदर्शन राजनीतिक: मो. सलीम

सलीन ने कहा कि यदि धर्म मंदिरों में है, इबादत घरों में है तो ये ठीक है, जैसे ही आप इसे वहां से बाहर निकालकर गलियों में ले आते हैं लड़ाइयां शुरू होने लगती हैं। इसीलिए हम धर्म को सड़क पर लाने का विरोध करते हैं।

न्यूज 24 ब्यूरो, नई दिल्ली (5 अक्टूबर): सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता और सांसद मो. सलीम ने कहा है कि उनकी पार्टी कभी भी पर्व-त्योहारों को मनाने के खिलाफ नहीं थी, उनका विरोध त्योहारों के राजनीतिकरण पर है।सलीम ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में कहा, 'रामनवमी हो या जन्माष्टमी, ईद हो या बकरीद इन त्योहारों को मनाने से लेफ्ट को परेशानी नहीं थी। सलीम ने कहा कि धर्म तो ठीक है, लेकिन धार्मिक त्योहार, तिथि, दिवस इनका इस्तेमाल राजनीतिक गोलबंदी के लिए करना ये काफी आपत्तिजनक है। चाहे ममता बनर्जी का पूजा उत्सव या फिर उनका टीपू सुल्तान मस्जिद के इमाम के साथ होने। इसके अलावा चुनावी उद्देश्य के संत समागम कराना।उन्होंने कहा कि भारत में 200-300 साल पहले ना तो रामनवमी का जुलूस निकाला जाता था और ना ही मुहर्रम की झाकियां निकलती थी। 19वीं सदी के अंत में जब भारत में राष्ट्रवाद का उभार हो रहा था तब अंग्रेजों ने गुंडों और कट्टरपंथियों को पैसे दिए और धर्म को सड़कों-गलियों पर ला दिया गया।सलीन ने कहा कि यदि धर्म मंदिरों में है, इबादत घरों में है तो ये ठीक है, जैसे ही आप इसे वहां से बाहर निकालकर गलियों में ले आते हैं लड़ाइयां शुरू होने लगती हैं। इसीलिए हम धर्म को सड़क पर लाने का विरोध करते हैं।साथ ही सलीम ने ममता बनर्जी और बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी, संघ का सबसे बड़ा आविष्कार थीं। सलीम ने कहा कि जब वो कांग्रेस में थीं, उन्हें आगे बढ़ाया गया। सलीम ने कहा कि ममता ने जब तृणमूल कांग्रेस बनाई गई उस समय कहा था कि आरएसएस के लोग देशभक्त हैं।न्यूज चैनल के कार्यक्रम में सलीम ने कहा, आप हमें एक प्रतिशत समर्थन दीजिए, उन्होंने खुशी-खुशी 100 फीसदी समर्थन दिया। आज भी आरएसएस के लोग कहते हैं कि अगर आरएसएस ना होता तो जो ममता आज है वो नहीं होतीं, इसलिए वो ममता को दुर्गा कहते हैं।"

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