चीनी राष्ट्रपति से आंखों में आंखे डालकर बात करेंगे प्रधानमंत्री मोदी

नई दिल्ली (4 अगस्त):  तीन महीने में दूसरी बार मोदी और शी की मुलाकात कई गुल खिला सकती है। अभी तक चीन ने एनएसजी मेंबरशिप और टेररिज्म के मुद्दे पर भारत का साथ नहीं दिया है। लेकिन अब साउथ चाइना सी जैसे मुद्दे पर चीन को भारत के समर्थन की दरकार है। तो भारत, पाक के कब्जे वाले कश्मीर में चीन-पाकिस्तान द्वारा इकोनॉमिक कॉरिडोर पर चीन पर दवाब बनायेगा। मोदी, पाक परस्त आतंकियों को यूएन की काली सूची में डाले जाने से रोकने के परिणाम से शी को अगाह कर सकते हैं। फिल्हाल भारतीय प्रधानमंत्री इस स्थिति में हैं कि वो चीनी राष्ट्रपति को दो टूक सुना भी सकते हैं और अपनी बात मनवाने के लिए मजबूर भी कर सकते हैं।

- तीन महीने में मोदी की जिनपिंग से दूसरी मुलाकात। लेकिन दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर तनाव जारी है। 

- चीन को लगता है कि वियतनाम और साउथ चाइना सी पर मोदी की अप्रोच एग्रेसिव है। 

- मोदी चीन-पाक कॉरिडोर का मुद्दा उठाकर चीन को डिफेंसिव मोड पर लाने की कोशिश करेंगे।

- चीन-पाक इकोनॉमिक कॉरिडोर पर भारत की चिंता। 46 अरब डॉलर का ये कॉरिडोर पीओके में गिलगित-बाल्तिस्तान से गुजरने वाला है। 

- एनएसजी मेंबरशिप चीन की वजह से भारत को नहीं मिल पाई।

- मोदी अगले साल होने वाली मीटिंग के लिए चीन का सपोर्ट चाहेंगे। 

- मोदी जैश-ए-मोहम्मद को यूएन से टेरर आउटफिट डिक्लेयर कराना चाहते हैं। चीन ने पिछली बार इसमें रोड़ा अटकाया था।