अलगाववादियों पर मोदी सरकार का यू-टर्न

अमित कुमार, नई दिल्ली (2 मई): पाकिस्तानी नेताओं के अलगाववादियों से बातचीत को लेकर जो सरकार अब तक कड़ा रुख दिखाती थी, अब वो मक्खन की तरह पिघल रही है। एक सवाल के जवाब में देश के विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने संसद में कहा है कि अलगाववादी नेताओं को किसी भी देश के प्रतिनिधि से मिलने में कोई रोक नहीं है।

कश्मीर के अलगाववादियों के पाकिस्तानी नेताओं से भारत में मुलाकात पर नाक भौं सिकुडते हुए कड़ा रुख अपनाने वाली मोदी सरकार ने अब गजब की ऐसी गुलाटी मारी है कि पूछिए मत। पिछले हफ्ते एक सवाल के जवाब में संसद में लिखित जवाब देते हुए विदेश राज्य मंत्री वीके सिंह ने कहा है कि जम्मू और कश्मीर भारत का एक अभिन्न अंग है और कश्मीर के अलगाववादी नेता भी भारतीय नागरिक हैं। इसके चलते वे किसी भी देश के प्रतिनिधि से मुलाकात और बात कर सकते हैं। वीके सिंह के इसी बयान के बाद सवाल उठने लगा कि क्या अब मोदी सरकार को कश्मीर के अलागवादियों की पाकिस्तानी नेताओं के साथ गलबहियां करने से कोई दिक्कत नहीं होगी? फिलहाल खबर सामने आते ही अलगाववादी और तेज़ आवाज में गरजने लगे।

आपको बता दें कि अगस्त 2014 में मोदी सरकार ही थी जिसने पाकिस्तान से विदेश सचिव स्तर की बातचीत ये कहकर रद्द कर दिया था कि क्यों पाकिस्तानी हाई कमिश्नर ने अलगाववादी नेताओं से बातचीत की। अगस्त 2015 में पाकिस्तान के NSA को भारत आना था। लेकिन उस वक्त भी अलगाववादी नेताओं के कारण बात रद्द हुई थी। 2015 में उफा समझौते के बाद जब बातचीत होनी थी, तब बी हुर्रियत नेताओं ने मुलाकात डिरेल करने की कोशिश की थी। तब तो मोदी सरकार ने हुर्रियत नेताओं को दिल्ली आने से साफ मना कर दिया था।

लेकिन अब सरकार के यू-टर्न पर बीजेपी की कश्मीर में सहयोगी पीडीपी पीठ थपथपा रही है और कश्मीर के दूसरे नेता देर से ही सही लेकिन बुद्धि आने पर शाबाशी दे रहे हैं। सब बोल रहे हैं, लेकिन चुप है तो सिर्फ मोदी सरकार। पिछले साल विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान को भारत या अलगाववादी नेताओं में से किसी एक को चुनने तक की बात कह डाली थी। लेकिन अब उन्हीं अलगाववादियों को लेकर सरकार का 180 डिग्री घूम जाना, क्या इसे पाकिस्तान से बातचीत के लिए मोदी सरकार की मजबूरी माना जाए?