वादों की अपेक्षा आर्थिक सुधार लाने में 'धीमी' रही मोदी सरकार: अमेरिकी रिपोर्ट

नई दिल्ली (6 जुलाई): भारत की 7.5 फीसदी वृद्धि दर पर सवालिया निशान उठाते हुए अमेरिका ने कहा है कि नरेंद्र मोदी सरकार की रफ्तार आर्थिक सुधारों के लिए किए गए वादों को पूरा करने में धीमी रही है। अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आंकड़ा बढ़ा चढ़ाकर भी बताया गया हो सकता है। हालांकि, अमेरिका ने नौकरशाही और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की शर्तों को आसान बनाने के क्षेत्रों में उठाए गए कदमों की तारीफ की है।

'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के विदेश विभाग ने एक रिपोर्ट में मंगलवार को कहा कि मोदी सरकार दूसरे आर्थिक सुधार लाने में धीमी रही है, जिसके लिए यह काफी मुखर रही है। हालांकि, रिपोर्ट में आर्थिक सुधारों की एक श्रृंखला खासकर जो कि नौकरशाही के फैसले लेने और कुछ क्षेत्रों में एफडीआई सीमा को बढ़ाए जाने को लेकर किए फैसलों की तारीफ की गई है। 

'इंवेस्टमेंट क्लाइमेट स्टेटमेंट्स फॉर 2016' नाम से जारी इस रिपोर्ट में इस बात पर गौर किया गया है कि कई ऐसे सुधार जिनका वादा किया गया, वे संसद में पास होने के लिए संघर्षरत हैं। इसके चलते कई निवेशक पीछे हट रहे हैं, जो कभी बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार के समर्थन में आगे चल रहे थे।

रिपोर्ट में उदाहरण दिया गया- कि सरकार भूमि अधिग्रहण बिल पर संसद में पर्याप्त राजनैतिक समर्थन नहीं जुटा पाई। निकट समय में इसके पास होने की संभावनाएं भी खत्म हो चुकी हैं। इसके अलावा सरकार अभी भी विपक्षी पार्टियों से गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स बिल पर अभी भी बातचीत कर रही है। जिसे बातचीत से अभी तक नहीं सुलझाया गया। जो भारत के जटिल कर व्यवस्था को सुव्यवस्थित कर सकता है, और जीडीपी को तुरंत तेजी दे सकता है।

स्टेट डिपार्टमेंट के ब्यूरो ऑफ इकॉनॉमिक एंड बिजनेस अफेयर्स की तरफ से पेश की गई रिपोर्ट में कहा गया, "जाहिर तौर पर, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ते देशों में से एक है। लेकिन इसने इंवेस्टर सेंटीमेंट पर दबाव डाला है, कि लगभग 7.5 फीसदी की वृद्धि दर को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया है।"