कश्मीर अशांति से निपटने के लिए महबूबा मुफ्ती के तरीके से 'बेसब्र' हुई मोदी सरकार

नई दिल्ली (20 अगस्त): आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर हाल में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में जितनी भी बैठक हुईं, उनमें लगभग हर कोई इस बात पर सहमत है कि कश्मीर में हालात दिन पर दिन बिगड़ रहे हैं। दो दिन पहले ही राजनाथ सिंह ने अपनी नाराजगी का इजहार किया था। जब उन्होंने यह जानना चाहा कि उन पत्थर फेंकने वालों की पहचान करने और गिरफ्तारी में मुश्किल क्या है, जिनकी वजह से श्रीनगर की सड़कों पर लगातार अशांति से बचा जा सके।

विरोध प्रदर्शनों के चलते नागरिकों और सुरक्षा बलों के बीच संघर्ष बढ़ता ही गया। जिसके चलते कई मौतें हुईं और दर्जनों नवयुवकों की आंखें चली गईं। जिससे हिंसा को और बढ़ावा मिला, फिर और ज्यादा मौतें हुईं। जारी अशांति को 40 दिन से ज्यादा का वक्त हो गया है। राज्य सरकार की खामोशी और गैरमौजूदगी भी महसूस की जा रही है।

'फर्स्टपोस्ट' के मुताबिक, जिन लोगों ने बैठक में हिस्सा लिया उन्होंने इस बात पर सहमति तो जताई लेकिन उनके पास राजनाथ सिंह की तरफ से उठाए गए सवालों का जवाब नहीं था। यह एक असाधारण बैठक थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह सचिव, रॉ सचिव, डायरेक्टर इंटेलिजेंस ब्यूरो (DIB) और सूचनाओं को जुटाने औऱ समन्वय करने वाले अधिकारी मौजूद रहे।