GST पर मोदी सरकार को मिली यह बड़ी सफलता...

नई दिल्ली (27 जुलाई): गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स रेट की लिमिट को संविधान संशोधन विधेयक में शामिल करने की कांग्रेस की मांग के विरोध में केंद्र सरकार को राज्यों का साथ मिल गया है। इससे संसद के मॉनसून सत्र में इस विधेयक को पास कराने के लिए आम सहमति बनाने में एनडीए सरकार को ज्यादा सहूलियत होगी।

राज्यों के वित्त मंत्रियों की समिति ने जीएसटी के लिए संविधान संशोधन विधेयक में एक लिमिट रखने के प्रस्ताव पर ऐतराज जताया। इस समिति ने मंगलवार को वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात की। इस कमेटी के अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने कहा, 'जीएसटी के रेवेन्यू न्यूट्रल रेट को संविधान में नहीं रखा जा सकता है। सभी राज्य इस पर एकमत हैं। रेट को या तो नियमावली में या जीएसटी ऐक्ट में रखा जा सकता है।'

केरल के फाइनैंस मिनिस्टर थॉमस इसाक ने कहा, 'कोई राज्य नहीं चाहता है कि जीएसटी रेट को संविधान में रख दिया जाए। यहां तक कि कांग्रेस शासित राज्य भी इसके पक्ष में नहीं हैं।' उन्होंने कहा कि राज्य विवादों के हल के लिए संविधान के तहत एक इकाई बनाने के विरोध में हैं और वे जीएसटी काउंसिल के पक्ष में हैं, जो किसी भी विवाद को हल करने का तरीका बनाए। जीएसटी काउंसिल राज्यों और केंद्र की संयुक्त इकाई होगी। इसाक ने कहा कि राज्य इंटर-स्टेट ट्रांजैक्शंस पर प्रस्तावित 1 पर्सेंट टैक्स खत्म करने के पक्ष में हैं। संसदीय समिति ने भी इसका विरोध किया है।